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उद्योगपतियों का अल्टीमेटम उद्योगों को 24 घंटे बिजली मुहैया कराए तभी जरनेटर. होंगे बंद

एनसीआर की 42 इंडस्ट्रियल एसोसिएशन की बैठक में उद्यमी बोले- दिल्ली में प्रदूषण के लिए हम जिम्मेदार नहीं

एचएसआईआईडीसी कुंडली के सभागार में बुधवार को एनसीआर की 42 इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के पदाधिकारियों की संयुक्त मीटिंग हुई। उद्योगपतियों में सरकार के प्रति काफी गुस्सा व नाराजगी दिखाई दी। मांग उठाई गई कि सरकार को चाहिए कि वह उद्योगों को 24 घंटे बिजली मुहैया कराए। बिजली बेकअप की व्यवस्था भी बिजली निगम को करनी होगी।

उसके बाद ही उद्योग डीजल जनरेटर पर प्रतिबंद लगा सकते हैं। यदि ऐसा नहीं हुआ तो एनसीआर के 3 लाख उद्योगों को ताला लगाना पड़ जाएगा। सरकार जनरेटर नहीं बल्कि स्माल स्केल इंडस्ट्रीज को बंद करने पर तुली हुई है।

उद्योगपतियों ने संयुक्त रूप से पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम मनोहरलाल व क्यूसीएम के चेयरमैन को लिखित शिकायत दी है। चेतावनी दी है कि समाधान नहीं हुआ तो एनसीआर के 3 लाख उद्योगपति सड़कों पर उतर आएंगे।

कॉन्फेडरेशन ऑफ हरियाणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के चेयरमैन कर्नल राज सिंगला, अशोक कोहली व कुंडली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रधान सुभाष गुप्ता ने कहा कि एनसीआर में पहली अक्टूबर से डीजल जनरेटर का इस्तेमाल प्रतिबंधित करने के आदेश दिए गए हैं। वायु प्रदूषण को कम करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (क्यूसीएम) ने यह निर्णय लिया है। डीजल जनरेटर से चलाने की मिली छूट भी समाप्त कर दी गई है। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के दौरान भी ऐसी सेवाओं को मिलने वाली छूट वापस ले ली गई है। कर्नल राज सिंगला ने सख्त लहजे में कहा कि एनसीआर में डीजल जनरेटर पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के निर्णय का विरोध किया जाएगा। इसे लेकर कॉन्फेडरेशन ऑफ हरियाणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन पहले मांगपत्र दे रही है।

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सुभाष गुप्ता ने कहा कि जनरेटर के बिना उत्पादन ठप हो जाएगा और उद्योग बंद हो जाएंगे। दिल्ली के प्रदूषण के लिए पानीपत, सोनीपत, गुरुग्राम, मानसेर, खरखौदा, बड़ी, नाथूपुर जैसे एरिया को जिम्मेदार ठहराना गलत है।

इस मौके पर राई इंडस्ट्रीज एसोसिएशन प्रधान राकेश देवगण, रिया प्रधान राकेश छाबड़ा, जीएस मंगला, धीरज चौधरी, प्रवीन कुमार जैन, राजेश गुप्ता आदि मौजूद थे।

करोड़ों का राजस्व दे रहे हैं, कोई सुनने को तैयार नहीं

जीएस मंगला ने कहा कि उद्योगपति सरकार को करोड़ों का राजस्व दे रहे हैं। जब उद्योगपतियों के हक व न्याय की बात आती है तो कोई सुनने को तैयार नहीं है। उद्योगपतियों को केवल यूज किया जा रहा है। उद्योगपति सरकार से केवल बिजली मांग रहे हैं। सरकार को भी पता है कि बिजली के बगैर उद्योग नहीं चल सकते। सरकार को 24 घंटे बिजली की व्यवस्था करनी चाहिए। यदि अपना हक हासिल करना है तो संगठित होना पड़ेगा। आंदोलन शुरू करना पड़ेगा। पीएम और सीएम से मिलना होगा। सड़क पर उतरना पड़ेगा। उसके बाद ही कोई हल निकल सकता है।

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