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संविधान की आत्मा में स्वच्छता, यही सच्ची राष्ट्रसेवा : ओएसडी वीरेंद्र बढ़खालसा

जहां सफाई होगी, वहीं मां लक्ष्मी का वास; गांव स्वच्छ होंगे तो समृद्धि आएगी

सोनीपत, 26 जनवरी। हरियाणा के मुख्यमंत्री के ओएसडी वीरेंद्र बढ़खालसा ने कहा कि स्वच्छता केवल रोज़मर्रा की आदत नहीं, बल्कि संविधान से जुड़ा नागरिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जिस देश ने स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, उस देश को स्वच्छ रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। ओएसडी बढ़खालसा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “जहां स्वच्छता होगी, वहीं मां लक्ष्मी का वास होगा और वहीं से समृद्ध भारत की नींव पड़ेगी।”

दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल द्वारा गांव मुरथल के कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में स्वच्छता संवाद एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के ओएसडी वीरेंद्र बढ़खालसा मुख्य अतिथि रहे, जबकि अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में गांव के सरपंच रामेश्वर उपस्थित रहे।

छात्राओं को संबोधित करते हुए ओएसडी बढ़खालसा ने कहा कि स्वच्छता हमारी संस्कृति और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है। हम सुबह उठकर मुंह इसलिए साफ करते हैं ताकि सुंदर दिखें, मंदिर जाने से पहले स्नान इसलिए करते हैं क्योंकि ईश्वर को शुद्धता पसंद है। उन्होंने कहा कि जब घर में साफ-सफाई से समृद्धि आती है, तो गांव और समाज की स्वच्छता से विकास क्यों नहीं आएगा। गांव हमारा है, तो उसकी स्वच्छता की जिम्मेदारी भी हमारी ही है।

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उन्होंने छात्राओं और ग्रामीणों से आह्वान किया कि सभी मिलकर प्लास्टिक के उपयोग से दूरी बनाएं और जल संरक्षण को अपनी आदत बनाएं। उन्होंने कहा कि जल प्रकृति द्वारा प्रदत्त अमूल्य उपहार है और इसका संरक्षण करना हम सबका दायित्व है। जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

ओएसडी बढ़खालसा ने कहा कि प्रकृति हमें निरंतर देती है, बदले में कुछ नहीं मांगती। ऐसे में पेड़-पौधों, जल और पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. श्री प्रकाश सिंह से आग्रह किया कि दीनबंधु छोटू राम विश्वविद्यालय किसानों के हित में ठोस कार्य करे। किसानों को यह जानकारी दी जाए कि किस मौसम में कौन-सी फसल उपयुक्त है और ऑर्गेनिक खेती से कैसे समाज और किसान दोनों को लाभ मिल सकता है।

उन्होंने कहा कि हमारे किचन में उपयोग होने वाली हर वस्तु किसान के खेत से आती है। यदि किसान ऑर्गेनिक तरीके से फल और सब्जियां उगाएंगे तो आम नागरिक स्वस्थ रहेगा और किसान आर्थिक रूप से समृद्ध होगा। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण को अपनाने का संकल्प लिया।

Khabar Abtak

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