अधिकारों के साथ-साथ मौलिक कर्तव्यों का बोध करवाता है गणतंत्र दिवस

सुरेंद्र सिंगल
लेखक हरियाणा में जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी हैं।
पूरा देश गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर खुशी से झूम रहा है। आखिर झूमे भी क्यों नहीं। 26 जनवरी 1950 को भारत में संविधान लागू हुआ, जिससे हम संप्रभुता संपन्न बने। भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने देश के लिए अनुपम संविधान की रचना की, जिसमें 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन का समय लगा। भारतीय संविधान में वे तमाम अधिकार हमें दिए गए हैं जो जीवन जीने के लिए जरूरी हैं। भारतीय संविधान से ही हमें समानता का अधिकार मिला, जिसमें कानून के समक्ष समानता, धर्म, वंश, जाति, लिंग या जन्म के आधार पर भेदभाव का निषेध अधिकार शामिल है। संविधान ने हमें स्वतंत्रता का, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, सांस्कृतिक और शिक्षा पाने का अधिकार दिया। इसके साथ ही संवैधानिक उपचारों का भी अधिकार दिया जिसमें यदि कहीं हमारे अधिकारों का हनन होता है तो हम कानूनी रूप से अपनी आवाज उठा सकते हैं। भारतीय संविधान हमें यह अधिकार देता है कि हम देश के अंदर कहीं भी अपनी आजीविका कमा सकते हैं। संवैधानिक अधिकारों का जनक लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को माना जाता है, जिन्होंने मौलिक अधिकारों की समिति का नेतृत्व किया और संविधान का एक अभिन्न अंग बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संविधान में दिए गए अधिकारों से ही हम अपने भविष्य का निर्माण करते हैं।
सदियों से गुलामी की जंजीरों और विदेशी कानून में जकड़े रहने से हमें मुक्ति मिली। संविधान से ही हमें अपना मूल देश भारत वापस मिला, जिससे हमारी पहचान है।
गणतंत्र दिवस के अवसर देश भर में आयोजित होने वाले समारोह के साथ-साथ मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर निकलने वाली प्रत्येक राज्यों की विकास परक झांकियां देश की समृद्धि, विरासत, संस्कृति और विकास की झलक प्रस्तुत करती हैं। वहीं दूसरी और थल, जल और वायु सेवा की टुकड़ियां हमारे देश की सैन्य ताकत का पूरे विश्व को अहसास करवाती हैं कि आज किसी भी क्षेत्र में अन्य देशों से कम या कमजोर समझने की भूल ना की जाए। वायु सेना के आकाश में हैरतअंगेज करतब देखकर जहां प्रत्येक भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा होता है, वहीं हम अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हैं। भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा देश की आन बान और शान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया जाता है। कर्तव्य पथ पर स्वर्णिम भारत नजर आता है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर शौर्य का प्रदर्शन करने वाले सैन्य कर्मियों, पुलिसकर्मियों, नागरिकों और बच्चों को वीरता पुरस्कार से नवाजा जाता है, जो दूसरों के लिए प्रेरणादाएक होता है और देश के प्रति समर्पण की भावना के लिए प्रेरित करता है। गणतंत्र दिवस पर हम देश की आजादी में अपनी प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों और महान स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हैं।
गणतंत्र दिवस कर्त्तव्य बोध का भी दिवस भी है, जो हमें राष्ट्र की समृद्धि के निर्माण में अहम योगदान दिलाने वाले मौलिक कर्तव्यों की पालना करने की भी याद दिलाता है और देश के हर गण के लिए सबसे जरूरी और हमारा परम धर्म है। भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक कर्तव्य में यह स्पष्ट उल्लेख है कि हम भारत के लोग संविधान की पालना करें, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करें। स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शो को अपने दिलो दिमाग में संजोए रखें। मौलिक कर्तव्य हमें बताते हैं कि हम अपने राष्ट्र की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करें। भारत के सभी लोगों में समरसता, समान प्रभुत्व की भावना को विकसित करें। वहीं हमारी सामाजिक और संस्कृति की गौरवशाली परंपरा के महत्व को समझें। मौलिक कर्तव्य देश के प्रत्येक नागरिक में पर्यावरण की रक्षा करने का बोध कराता है जो हमें प्रकृति से मिला है। इसके साथ ही हमारे अंदर वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखना और ज्ञान अर्जित करने की भावना विकसित करने की भी याद दिलाता है। संविधान निर्माताओं ने मौलिक कर्तव्यों में यह स्पष्ट उल्लेख किया है कि हम सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करें, उसको सुरक्षित रखें, उसको प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी प्रकार से नुकसान ना पहुंचाएं। अपने बच्चों को शिक्षित करें।
देश की आजादी और संविधान को लागू होने के बाद भारत देश निरंतर प्रगति के पथ पर है। राष्ट्र अनाज उत्पादन के साथ चिकित्सा, शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, हवाई, रेल, सड़क और राजमार्ग आदि परिवहन के साथ साथ हर क्षेत्र में उन्नति कर रहा है। आज हम जहां एक तरफ अपने देश की रक्षा और सुरक्षा में सक्षम हैं, जिसका समय-समय पर हमने पूरी दुनिया को एहसास करवाया है। जिसने भी भारत की ओर आंख उठा कर देखने की हिमाकत की है, उनका हमारी सेना ने मुंह तोड़ जवाब दिया है और जिसकी गवाह पूरी दुनिया बनी है।
भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने हर भारतीय में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नया जज्बा और जोश भरने का काम किया है। उनकी भारत को वर्ष 2047 तक संपूर्ण रूप से विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना में हर नागरिक का योगदान जरूरी है। उनका यह आह्वान कि भारत देश तभी आत्मनिर्भर बनेगा, जब हमारे देश में बनी वस्तुओं में अपने नागरिकों के पसीने की खुशबू आएगी, लेकिन यह तभी पूर्ण रूप से सार्थक होगा, जब प्रत्येक व्यक्ति अपने अधिकारों का प्रयोग करने के साथ-साथ संविधान में दिए गए मौलिक कर्तव्यों का भी पालन करें।
आइए, गणतंत्र दिवस की इस पावन बेला पर हम अपने राष्ट्र को और अधिक समृद्ध और पूर्ण रूप से विकसित बनाने में अपना योगदान देने के साथ साथ सामाजिक बुराइयों को जड़मूल से मिटाने, किसी भी प्रकार की महामारी का मुकाबला करने और राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा में अपना योगदान देने का संकल्प लें।
लेखक हरियाणा में जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी हैं।


