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सोनीपत में 14 मंजिल के टावर के सातवें फ्लोर पर लगी आग, एक ही परिवार के पति-पत्नी और बच्ची को बाहर निकाला

पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। 14 मंजिल के सी ब्लॉक में आग लगी है। मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में आग लगने पर काबू पाने को कोई प्रबंध नहीं है। दिल्ली से हाइड्रोलिक प्लेटफार्म पहुंची।

सोनीपत :- नेशनल हाईवे-44 पर गांव कुमासपुर के पास स्थित एपेक्स ग्रीन सोसाइटी के सी-टावर में सातवीं मंजिल पर बने फ्लैट में देर रात आग लग गई। फ्लैट के अंदर एक ही परिवार के दंपती और उनकी बच्ची फंसे हुए थे, जिन्हें देर रात निकाल लिया गया। कुल 14 मंजिल की इस इमारत में ऊपर के सभी फ्लोर पर फसे अन्य लोगों में से 12-13 लोगों को निकाल लिया गया है।

खबर लिखे जाने तक अभी भी कुछ लोगों के फंसे होने की खबर है। उनको निकालने का प्रयास किया जा रहा है। आग लगने के कारण का पता नहीं लग सका है। अग्निशमन विभाग की पांच गाड़ी आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही हैं। देर रात दिल्ली से हाइड्रोलिक प्लेटफार्म भी पहुंच गई है।

गांव कुमासपुर के पास स्थित एपेक्स ग्रीन सोसाइटी के सी-टावर की सातवीं मंजिल पर बने फ्लैट में शनिवार देर रात करीब साढ़े 11 बजे अचानक आग लग गई। आग की लपटें देखकर आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। सातवीं मंजिल पर एक परिवार के तीन सदस्य फ्लैट में फंस गए। उन्हें बाद में मशक्कत से बाहर निकाल लिया गया।

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इसके अलावा आठवीं मंजिल से पांच, नौवीं मंजिल से 4, दसवीं मंजिल से चार लोगों को निकाल लिया गया है, जिस पर रात एक बजे के बाद नियंत्रण पा लिया गया। अभी भी ऊपर की मंजिल में कुछ लोग फंसे हुए हैं। उन्हें निकालने की प्रक्रिया चल रही है। दमकल विभाग की टीम लगातार प्रयास कर रही है।

अग्निशमन विभाग के सहायक मंडल अधिकारी राजेंद्र सिंह दहिया अपनी टीम के साथ मौके पर लगातार प्रयासरत हैं। वहीं बहालगढ़ थाना प्रभारी देवेंद्र कुमार की टीम भी बचाव कार्य में लगी है। आग लगने के कारणों का पता नहीं लग सका है।

फिर खली हाइड्रोलिक प्लेटफार्म की कमी
दमकल विभाग के पास अभी भी हाइड्रोलिक प्लेटफार्म नहीं है। हाइड्रोलिक प्लेटफार्म नहीं होने के कारण ऊंची इमारतों में आग लगने पर उस पर काबू पाने में दिक्कत आती है। जिले में बढ़ रही आग की घटनाओं को लेकर व्यापारी कई बार रोष जता चुके हैं। कुंडली, राई, बड़ी क्षेत्र में 10 हजार से ज्यादा छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। गाड़ियों की कमी के कारण अधिकारियों को दिल्ली के अलावा, झज्जर, पानीपत से भी गाड़ियां मंगानी पड़ती हैं। वहीं करीब 140 ऊंची इमारत होने के बाद हाइड्रोलिक प्लेटफार्म नहीं होना कई तरह के सवाल खड़ा कर रहा है।

Khabar Abtak

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