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विश्व जल दिवस पर गांव पलड़ी खुर्द स्थित होटल दिल्ली 36 में किया गया “जल संवाद कार्यक्रम” का आयोजन

-जल संरक्षण अपनाकर सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ें किसान–नवीन हुड्डा

-जल संरक्षण एवं सतत कृषि पर दिया गया विशेष बल

सोनीपत, 24 मार्च। विश्व जल दिवस के अवसर पर परमार्थ समाज सेवी संस्थान द्वारा गांव पलड़ी खुर्द स्थित होटल दिल्ली 36 में “जल संवाद” कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सहायक अभियंता नवीन हुड्डा ने किया। कार्यक्रम का उद्देश्य जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना रहा।

कार्यक्रम में सहायक अभियंता नवीन हुड्डा ने कहा कि जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है और इसके बिना भविष्य की कृषि एवं जीवन की कल्पना संभव नहीं है। उन्होंने किसानों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे धान की सीधी बुवाई, फसल विविधीकरण, फसल चक्र तथा सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों जैसी जल बचत तकनीकों को अपनाएं, जिससे कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा इन तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है, जिसका अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यदि हम सभी मिलकर जल संरक्षण की दिशा में कार्य करें, तो न केवल भूजल स्तर को बचाया जा सकता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य भी सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा धान की सीधी बुवाई पर प्रति एकड़ 4500 रुपये तथा धान के स्थान पर अन्य फसल अपनाने पर प्रति एकड़ 8000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

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कार्यक्रम के अंत में श्री हुड्डा ने परमार्थ संस्था एवं हिंदुस्तान यूनिलीवर द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास से ही संभव है। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से जल बचाने और सतत कृषि अपनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

जल संवाद कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों, पंचायत सदस्यों तथा किसानों ने भाग लेते हुए जल संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान परमार्थ संस्था द्वारा जल संरक्षण एवं सतत कृषि के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। इसमें धान की सीधी बुवाई, गेहूं उत्पादन की उन्नत पद्धति, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली जैसे टपक एवं फव्वारा विधि, कम पानी वाली फसलों जैसे चना, मटर एवं सरसों को बढ़ावा देने, कृषि अवशेष प्रबंधन हेतु कस्टम हायरिंग केंद्र तथा भूजल संरक्षण एवं पेयजल उपलब्धता के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की गई। बताया गया कि ये सभी गतिविधियां मुरथल खंड के 10 गांवों में प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं।

इस मौके पर कृषि विभाग से एडीओ मुरथल दिनेश आंतिल एवं एडीओ राई अजय, रूट फाउंडेशन से सुनील कुमार, ग्राम पंचायत पलड़ी खुर्द के प्रधान पदम, हिंदुस्तान यूनिलीवर फैक्ट्री की मानव संसाधन प्रबंधक रितिका तथा संस्कार भारती विद्यापीठ के प्राचार्य समय सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। इसके अलावा परमार्थ संस्था की टीम तथा परियोजना से जुड़े लगभग 50 किसान भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

Khabar Abtak

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