GohanaReligion

नवरात्र पर्व पर पूजा करने के बाद बोले डॉ. गजराज कौशिक ; बेटा जन्मे या बेटी, दोनों की ऊर्जा का स्रोत मां ही

गोहाना :- 18 अक्तूबर : जन्म लेने वाले प्रत्येक जीव के दो डी. एन. ए. होते हैं। एक डी.एन.ए. में 50 प्रतिशत अंश मां तो बाकी का 50 प्रतिशत अंश पिता का होता है। लेकिन जो दूसरा डी. एन. ए. होता है, उसमें 100 प्रतिशत अंश मां का होता है। इसी डी.एन.ए. से ऊर्जा प्राप्त होती है। इस तरह से जन्म बेटा ले या बेटी, दोनों की ऊर्जा का एकाकी स्रोत मां होती है। नवरात्र पर्व पर यह रोचक खुलासा आई. एम. ए. की गोहाना इकाई के निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. गजराज कौशिक ने किया। वह नवरात्र में मां की आराधना करने के पश्चात पत्रकारों से मुखातिब हो रहे थे। उन्होंने युगल रूप से पूजा अपनी शिक्षिका पत्नी नीलम कौशिक के साथ की। डॉ. गजराज कौशिक ने कहा कि भारतीय पौराणिक परम्पराएं विज्ञान की कसौटी पर शत-प्रतिशत खरी उतरती हैं।

WhatsApp Image 2024-08-03 at 12.46.12 PM
WhatsApp Image 2024-08-03 at 12.55.06 PM
c3875a0e-fb7b-4f7e-884a-2392dd9f6aa8
1000026761
WhatsApp Image 2024-07-24 at 2.29.26 PM

नवरात्र नारी शक्ति के रूप में देवियों की पूजा की परिपाटी भी वैज्ञानिक है। अपनी बात को स्पष्ट करतें हुए डॉ. कौशिक ने कहा कि तकनीकी रूप से प्रत्येक जीव के डी. एन. ए. डबल होते हैं। इनमें जिस डी.एन.ए. में माता और पिता के अंश आधे-आधे होते हैं, उसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में मोलिक्यूलर माइट्रोकॉन्ड्रियल डी.एन.ए. कहते हैं। लेकिन जिस दूसरे डी. एन. ए. में पूरा अंश केवल मां का होता है, उसे माइट्रोकॉन्ड्रियल डी. एन. ए. कहा जाता है। यही डी. एन. ए. सकल ऊर्जा का एकमात्र स्रोत होता है। डॉ. गजराज कौशिक ने कहा कि चं कि हम सब को ऊर्जा केवल मां के अंश वाले दूसरे डी. एन. ए. से प्राप्त होती है, इसी लिए मां ऊर्जा के स्रोत के रूप में आदिकाल से अब तक समान रूप से आराध्य हैं और इसी के चलते देवियों की नारी शक्ति के रूप में पूजा कर उनके प्रति कृतज्ञता का ज्ञापन होता है।

Khabar Abtak

Related Articles

Back to top button