गोहाना :-16 अक्तूबर : बंदा वीर बैरागी ने मुगलों के अजेय होने के भ्रम को तोड़ा था। यह बंदा वीर बैरागी ही थे जिन्होंने नांदेड में गोदावरी नदी के तट पर मठ स्थापित करते हुए गुरु नानक देव और गुरु गोविंद सिंह के नाम से सिक्के चलाए थे। सोमवार को यह टिप्पणी आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे के निदेशक डॉ. सुरेश सेतिया ने की। वह वार्ड नंबर 8 स्थित सचखंड गुरुद्वारे के कम्युनिटी सेंटर में बंदा वीर बैरागी की 353वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे। अध्यक्षता मोर्चे के संरक्षक आजाद सिंह दांगी ने की। मार्गदर्शन गुरुद्वारे के हेड ग्रंथी भाई गुरदीप सिंह का रहा। आजाद सिंह दांगी ने कहा कि बंदा वीर बैरागी ने तपस्वी बनने के लिए 15 साल की उम्र में घर-बार का त्याग कर दिया था। यह बंदा वीर बैरागी ही थे जिन्होंने जमींदारी प्रथा को समाप्त किया था तथा हलवाहक को उसकी जमीन का मालिक बनाया था। इस अवसर पर रमेश मेहता, हरभगवान चोपड़ा, राजपाल कश्यप, कश्मीरी लाल बावा, सरदार इंद्र सिंह, सरदार गुरुचरण सिंह, राम प्रकाश वधवा, भारत भूषण खेत्रपाल, गुलशन शर्मों आदि भी उपस्थित रहे।



