सोनीपत :- चिट्ठी आई है, आई है, चिट्ठी आई है, बड़े दिनों के बाद… अब यह गाना सिर्फ यादों में सिमटकर रह गया है। इसका कारण यह है कि आज हम आधुनिकता की दौड़ में चिट्ठी लिखना ही भूल चुके हैं। अब इंटरनेट, ईमेल, मोबाइल फोन, एसएमएस और कूरियर के जमाने में पोस्ट ऑफिस की कार्यशैली में बदलाव आ गया है।
बदलते दौर में घर से जाते समय अब कोई नहीं कहता है कि पहुंचते ही चिट्ठी लिखना न भूलना। आज की नई पीढ़ी पत्र लेखन की कला से कोसों दूर है। एक वक्त था जब बेसब्री से लोग पोस्टमैन का इंतजार करते थे। पहले के जमाने में अधिकतर लोग पढ़े-लिखे नहीं होते थे, वह अपने पत्र दूसरों से लिखवाते थे और जब उनके पत्र का जवाब आता था तो उत्सुकता से उसे दूसरों से पढ़वा कर सुनते थे। डाकिया भी जब पत्र लेकर आता था तो लोग उससे पूछते थे, अरे डाकिया भैया! हमारी कोई चिट्ठी तो नहीं आई है और उसके जवाब में डाकिया भी मुस्कुराता था और कहता था अभी नहीं आई भैया, आएगी तो जल्दी आप तक पहुंचा दूंगा।
आज का दौर बदल गया है, डाकिया तो आज भी है, लेकिन वह चिट्ठी नहीं लाते हैं। इस व्हाट्सएप के जमाने में लोग चिट्ठियों की नहीं, व्हाट्सएप पर मैसेज का इंतजार करते हैं। भारतीय डाक सेवा ने 1 अक्तूबर 2023 को अपने सफर के 169 वर्ष पूरे कर लिए हैं। देश में 1766 में लॉर्ड क्लाइव ने पहली बार डाक व्यवस्था स्थापित की थी। इसके बाद 1774 में वारेन हेस्टिंग्स ने कोलकाता में प्रथम डाकघर स्थापित किया था। वहीं देश में 1854 में टिकटों की शुरुआत हुई थी। आज एक साधारण चिट्ठी से लेकर विदेश जाने के लिए पासपोर्ट तक बनवाने का कार्य डाक विभाग कर रहा है। इसके साथ सभी अल्प बचत योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, पीपीएफ, आधार सुधार, बिल जमा, गंगाजल की खरीदारी और देश विदेश तक वाटरप्रूफ लिफाफे में राखी समय पर विभाग भेज रहा है। डाक विभाग के पास डाक जीवन बीमा और ग्रामीणों के लिए विशेष ग्रामीण डाक जीवन बीमा भी चलाई जा रही है।
बदलते दौर में घर से जाते समय अब कोई नहीं कहता है कि पहुंचते ही चिट्ठी लिखना न भूलना। आज की नई पीढ़ी पत्र लेखन की कला से कोसों दूर है। एक वक्त था जब बेसब्री से लोग पोस्टमैन का इंतजार करते थे। पहले के जमाने में अधिकतर लोग पढ़े-लिखे नहीं होते थे, वह अपने पत्र दूसरों से लिखवाते थे और जब उनके पत्र का जवाब आता था तो उत्सुकता से उसे दूसरों से पढ़वा कर सुनते थे। डाकिया भी जब पत्र लेकर आता था तो लोग उससे पूछते थे, अरे डाकिया भैया! हमारी कोई चिट्ठी तो नहीं आई है और उसके जवाब में डाकिया भी मुस्कुराता था और कहता था अभी नहीं आई भैया, आएगी तो जल्दी आप तक पहुंचा दूंगा।
आज का दौर बदल गया है, डाकिया तो आज भी है, लेकिन वह चिट्ठी नहीं लाते हैं। इस व्हाट्सएप के जमाने में लोग चिट्ठियों की नहीं, व्हाट्सएप पर मैसेज का इंतजार करते हैं। भारतीय डाक सेवा ने 1 अक्तूबर 2023 को अपने सफर के 169 वर्ष पूरे कर लिए हैं। देश में 1766 में लॉर्ड क्लाइव ने पहली बार डाक व्यवस्था स्थापित की थी। इसके बाद 1774 में वारेन हेस्टिंग्स ने कोलकाता में प्रथम डाकघर स्थापित किया था। वहीं देश में 1854 में टिकटों की शुरुआत हुई थी। आज एक साधारण चिट्ठी से लेकर विदेश जाने के लिए पासपोर्ट तक बनवाने का कार्य डाक विभाग कर रहा है। इसके साथ सभी अल्प बचत योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, पीपीएफ, आधार सुधार, बिल जमा, गंगाजल की खरीदारी और देश विदेश तक वाटरप्रूफ लिफाफे में राखी समय पर विभाग भेज रहा है। डाक विभाग के पास डाक जीवन बीमा और ग्रामीणों के लिए विशेष ग्रामीण डाक जीवन बीमा भी चलाई जा रही है।



