गोहाना :- 22 सितम्बर :. नई अनाज मंडी के पहले शेड के नीचे शुक्रवार को आढ़ती एसोसिएशन की बैठक हुई। यह बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। इस बैठक के अनिर्णीत खत्म होने के बाद आढ़ती एसोसिएशन दोफाड़ हो गई। जहां दो साल से अध्यक्ष चल आ रहे विनोद सहरावत एक और साल के लिए अध्यक्ष बनने का दावा कर रहे हैं, वहीं राजेंद्र कुंडू का दावा है कि आढ़त एसोसिएशन के अध्यक्ष वह हैं। गुरुवार को राजेंद्र कुंडू ने अपनी दुकान पर हुई बैठक के बाद कहा था कि वह आढ़ती एसोसिएशन के
अध्यक्ष बन गए हैं। उन्हें आढ़तियों ने सर्वसम्मति से
अध्यक्ष बना दिया है।
आढ़ती एसोसिएशन एक बनी रहे और उसके दो टुकड़े न हों, इसी पर विचार करने के लिए शुक्रवार को आढ़ती एसोसिएशन की बैठक बुला ली गई। पहले इस बैठक में पुराने अध्यक्ष विनोद सहरावत और उनके समर्थक आढ़ती पहुँचे, लेकिन बाद में बुलाने पर राजेंद्र कुंडू भी पहुंच गए। विनोद सहरावत खंदराई गांव के हैं। राजेंद्र कुंडू का गांव दुराणा है। शुक्रवार की आढ़ती एसोसिएशन की बैठक की अध्यक्ष 94 साल के वयोवृद्ध आढ़ती रामधारी जिंदल ने की। जिंदल लगातार 38 साल तक आढ़ती एसोसिएशन का नेतृत्व कर चुके हैं।
इस बैठक में आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्षों में डॉ. प्रदीप कुमार और श्याम लाल वशिष्ठ भी पहुंचे। बैठक प्रारंभ होने पर अध्यक्ष विनोद सहरावत की ओर से जिनेंद्र जैन ने लेखा-जोखा पेश किया। उन्होंने पेशकश की कि कोई भी आढ़ती कभी भी कोई भी डिटेल चेक कर सकता है। उन्होंने कहा कि सहरावत एसोसिएशन के काम से कहीं भी गए, उन्होंने पूरा खर्च खुद किया तथा एसोसिएशन पर कोई बोझ कभी नहीं डाला। विनोद सहरावत ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने अपनी ओर से अच्छे से अच्छा काम करने की कोशिश की। कोई कसर रह गई तो उसके लिए माफी मांगते हैं। बैठक की अध्यक्षता कर रहे रामधारी जिंदल ने जोर दे कर कहा कि अध्यक्ष दो नहीं, एक ही होना चाहिए।उन्होंने कहा कि अगर एसोसिएशन दोफाड़ हो गई, उससे आढ़तियों को भारी नुकसान होगा तथा दूसरे सब लोग इस का नाजायज फायदा उठाने का प्रयास करेंगे।
जिंदल के निर्देश पर संजीव सिंघल ने राजेंद्र कुंडू
को फोन किया। सिंघल के फोन के बाद थोड़ी ही देर में कुडू बैठक में भी गए। उनकी आढ़ती की शॉप वहीं पास में थे जहां बैठक हो रही थी। उसके बाद अलग-अलग सुर रहे। कोई इलेक्शन करवाने का हिमायती था तो कोई सर्वसम्मत चुनाव चाहता था। कोई विनोद सहरावत को एक और मौका देने की वकालत करने लगा तो कोई राजेंद्र कुंडू को बनाने की बात करने लगा। एक वर्ग ऐसा भी था जो सहरावत और कुंडू को छोड़ तीसरे को अध्यक्ष बनाना चाहता था।
एक सुझाव यह भी आया कि दस बुजुर्ग आढ़तियों की कमेटी बना दी जाए। जो नाम कमेटी तय करे, उसे सब स्वीकार कर लें। इसी ऊहापोह के बीच हंगामा तेज हो गया तथा आढ़तियों की बैठक बिना फैसला समाप्त हो गई। उसके बाद विनोद सहरावत और राजेंद्र कुंडू ने अपने-अपने अध्यक्ष होने के दावे ठोके। सहरावत ने कहा कि उनकी कार्यकारिणी ने बैठक में त्यागपत्र दे दिया। इस पर अध्यक्ष तो वह रहेंगे, लेकिन कार्यकारिणी नई बनेगी। सहरावत ने कहा कि वह नई कार्यकारिणी का गठन एक से दो दिन में कर लेंगे। उन्होंने कुंडू पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अपने घर में बैठ कर कोई अध्यक्ष नहीं बना करता । उधर, राजेंद्र कुंडू ने माना कि आढ़तियों की बैठक में कोई फैसला नहीं हुआ, लेकिन साथ में यह दावा भी किया कि बैठक में स्वयं विनोद सहरावत ने अपनी कमियों के लिए माफी मांगते हुए त्यागपत्र दे दिया। लेकिन सहरावत ने स्पष्ट किया कि इस्तीफा उनकी कार्यकारिणी ने दिया, उन्होंने नहीं, अध्यक्ष वह थे और वही रहेंगे। राजेंद्र कुंडू ने कहा कि वह अध्यक्ष हैं। उन्हें
जिम्मेदार लोगों ने अध्यक्ष बनाया है । उनके अनुसार वह
कच्चे-पक्के आढ़ती सब के लिए काम करेंगे। वह सब को साथ ले कर चलेंगे। उनके अनुसार वह अपना समर्थन जुटाने के लिए रजिस्टर को पूरी मंडी में घुमाएंगे और उसके बाद बैठक बुलाएंगे। इस बैठक में विनोद जैन, सत्य नारायण मित्तल, नरेंद्र बंसल, गौरव जैन, संदीप शर्मा, संत लाल बजाज, राम मेहर रोहिल्ला, मनोज बजाज, विजय जिंदल, सतीश गोयल आदि आढती भी उपस्थित रहे।



