

गुरुग्राम, (अनिल जिंदल) 28 फरवरी । श्री गुरु गोबिंद सिंह ट्राई सेंटेनरी यूनिवर्सिटी (एसजीटीयू) के लिए आज का दिन बहुत खास रहा। विशाल प्रांगण में राधा-कृष्ण के साथ फूलों की होली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। न किसी के पास रंग था, न गुलाल और न ही पानी।
हजारों छात्र-छात्राओं, फैकल्टी सदस्यों और अन्य अधिकारियों व पदाधिकारियों ने भरपूर जोश और असीमित उल्लास के साथ इस होली में साथ भाग लिया और घंटों जमकर फूलों की होली खेली। भगवान श्रीकृष्ण व राधा के प्रति श्रद्धा व आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा, उमंग व होली का उत्साह चरम पर रहा।
सिर्फ और सिर्फ फूलों से खेली गई यह होली हजारों छात्र-छात्राओं, फैकल्टी मेंबर्स, अधिकारियों, कर्मचारियों के लिए यादगार बन गई।
सुबह दस बजे दीप प्रज्वलन के बाद भव्य एवं रंगारंग कार्यक्रम की शुरुआत वेलकम डांस (ऋतु वसंत) से हुई।
एक मनोहारी लोकनृत्य प्रस्तुत किया गया जिसने महाराष्ट्र में होली की भावना अभिव्यक्त की। इसमें भावपूर्ण अभिनय, वसंत की दिव्य आभा से सुसज्जित रंगों की छटा और उत्सवी लय का आनंदमय समावेश था।
इसके बाद सूफियाना होली को प्रतिबिंबित करता हुआ
सूफी नृत्य पेश किया गया। इसमें सूफी परंपरा की रहस्यात्मकता और होली के उल्लासपूर्ण उत्सव के सुंदर एवं प्रभावशाली आध्यात्मिक समन्वय ने दर्शकों को आकर्षित किया।
इसके बाद थिएटर (कॉमेडी एक्ट) पेश किया गया जिसने भारी संख्या में उपस्थित छात्र-छात्राओं और विश्वविद्यालय के कर्मचारियों, फैकल्टी सदस्यों, अधिकारियों को हंसा कर लोटपोट कर दिया।
बंगाली नृत्य (फागुन हवाई हवाई) में प्रतिभागियों ने जो क्रिएटिव डांस किया, उसमें ऋतु परिवर्तन और ‘फागुन’ के आगमन के उत्सव की साकार अनुभूति हुई। इस नृत्य ने ऑडियंस को झूमने पर मजबूर कर दिया।
शास्त्रीय शैली से प्रेरित नृत्य प्रस्तुति ‘रंग रंग दे’ ने रंगों की पवित्रता और उनके प्रेम व जीवन में गहरे अर्थ को व्यक्त किया। उल्लास के त्यौहार होली की आभा को इस प्रस्तुति ने कई गुना बढ़ा दिया।
गुजराती डांस (रांचोर रंगीला) में ऊर्जावान गरबा प्रस्तुति थी जिसमें कान्हा को ‘रणछोड़ रंगीला’ के रूप में दर्शाया गया।
इसके बाद बारी आई कान्हा जी के महारास की।
‘कान्हा तेरे संग बांधी है डोरी’ नृत्य में राधा और गोपियों के साथ श्रीकृष्ण के शाश्वत प्रेम संबंध को भावुक, रोचक व आकर्षक भाव भंगिमा के साथ प्रस्तुत करके ऑडियंस को भाव विभोर कर दिया गया।
टॉलीवुड (लाहे लाहे): भारत की सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मनाती एक गतिशील और ऊर्जावान बॉलीवुड नृत्य प्रस्तुति ने दर्शकों को अपने रंग में रंगने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
होली के उल्लास का पर्यायवाची बन चुके गीत
‘रंग बरसे भीगे चुनरवाली रंग बरसे’ में कलाकारों ने ऐसा समां बांधा कि आयोजन स्थल पर इस छोर से उस छोर तक आनंद, होली की मस्ती, त्योहार की आभा और सामाजिक-सांस्कृतिक परंपरा की लहर दिखाई दे रही थी।
भक्ति की शक्ति (नरसिंह और प्रह्लाद) प्रस्तुति में प्रह्लाद की कथा की सुंदरता को लयबद्ध ताल और आनंदमय भाव-भंगिमाओं के माध्यम से सजीव रूप दिया गया।
कोक स्टूडियो (रंग दरूंगी नंद के लालन पे) में
भारतीय शास्त्रीय गायन और रैप के मधुर फ्यूजन पर आधारित वेस्टर्न डांस प्रस्तुति दी गई। युवा वर्ग ने कलाकारों के साथ कदमताल करते हुए कार्यक्रम का आनंद लिया।
इसके बाद ब्रज की होली
(ब्रज क्षेत्र में पारंपरिक होली उत्सव की अवधारणा का चित्रण) की प्रस्तुति का प्रभाव तो देखते ही बनता था। यह एक भव्य भक्तिमय नृत्य-नाटिका थी जो होली के अवसर पर ब्रज क्षेत्र में पारंपरिक रूप से निभाई जाने वाली सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाती है तथा देवी राधा और भगवान श्रीकृष्ण की स्मृति को समर्पित है।
इसके बाद उत्साह, उमंग, तरंग, श्रद्धा, भक्ति, आस्था, समर्पण, उल्लास का वह दौर चला जिसने दर्शकों को घंटों आनंद के सागर में डुबोए रखा। राधा-कृष्ण के आगमन के साथ ही सभी
उनके दर्शन करने , उनके साथ होली खेलने के लिए सभी उमड़ पड़े। पहले प्रबंधन की ओर से राधा-कृष्ण की पूजा-अर्चना की गई, फिर फूलों की होली की शुरुआत हुई और सारा माहौल राधा-कृष्णमय हो गया। फूलों की होली घंटों चली और सभी ने जमकर फूलों की होली खेली।
इस अवसर पर एसजीटी यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति पद्मश्री व पद्मभूषण राम बहादुर राय, दशमेश चैरिटेबल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी मनमोहन सिंह चावला, चेयरपर्सन श्रीमती मधु प्रीत कौर चावला, वाइस चांसलर (डॉ) हेमंत वर्मा, प्रो वाइस चांसलर प्रो (डॉ) अतुल नासा,जयपाल मलिक, स्टेट डायरेक्टर (सेवानिवृत्त), नेहरू युवा केंद्र, भारत सरकार उपस्थित रहे।



