एसजीटीयू में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन, सात देशों व भारत के 22 राज्यों के ‘थिंक टैंक’ जुटे
शोधपत्रों, संबोधनों से बताया गया 'नैरेटिव डिप्लोमेसी' का महत्व

गुरुग्राम, (अनिल जिंदल) 26 फरवरी । श्री गुरु गोबिंद सिंह ट्राई सेंटेनरी यूनिवर्सिटी (एसजीटीयू) में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “चेंजिंग डाइनेमिक्स ऑफ इंडिया’ज नैरेटिव डिप्लोमेसी” का प्रभावशाली आयोजन हुआ जिसमें सात देशों व भारत के 22 राज्यों के विषय विशेषज्ञों ने बदलते समय, हालात , संदर्भ, अपेक्षाओं और अनिवार्यताओं पर गहन प्रकाश डाला व बड़ीh संख्या में शोध प्रस्तुत किए गए। 75 से अधिक विश्वविद्यालयों , शोध संस्थानों एवं नीति- निर्माण निकायों की कार्यक्रम में प्रत्यक्ष भागीदारी रही।
एसजीटीयू की फैकल्टी ऑफ ह्यूमैनिटीज, सोशल साइंसेज एंड लिबरल आर्ट्स द्वारा इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स के सहयोग तथा इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च के प्रायोजन में किया गया यह सम्मेलन एक समृद्ध, बहुआयामी और गंभीर अकादमिक विमर्श के रूप में संपन्न हुआ। दो दिनों तक चले विचार-विमर्श में विद्वानों, कूटनीतिज्ञों और विशेषज्ञों ने सामूहिक रूप से यह प्रतिपादित किया कि भारत की वैश्विक सहभागिता अब केवल पारंपरिक शक्ति-राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि वह नैरेटिव, धारणा-निर्माण और रणनीतिक संप्रेषण से गहराई से असर दिखा रही है।
कार्यक्रम की मॉडरेटर
डॉ. नंदिनी बसिष्ठा ने अपने स्वागत भाषण में पारंपरिक कूटनीति से “बहु-सत्य” की ओर संक्रमण पर प्रकाश डालते हुए भोजन परंपराओं, प्रवासी सहभागिता और सोशल मीडिया की भूमिका को रेखांकित किया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) हेमंत वर्मा ने उद्घाटन भाषण में समकालीन भू-राजनीतिक संदर्भों में भारत की नैरेटिव कूटनीति की प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
तकनीकी सत्रों में विविध विषयों पर गहन शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
सत्र एक “इंडिया’ज नैरेटिव डिप्लोमेसी: थ्योरी एंड प्रैक्सिस” में 19 शोधपत्रों ने धर्म, सतत विकास और संवैधानिक नैतिकता को भारत की सॉफ्ट पावर के स्तंभों के रूप में रेखांकित किया।
सत्र दो में “द नैरेटिव डिप्लोमेसी आफ डिफरेंट कंट्रीज” में 8 शोधपत्रों के माध्यम से विभिन्न देशों की रणनीतिक कहानी-वाचन शैली और नैतिक आधारों की समीक्षा की गई।
सत्र तीन में 8 शोधपत्रों ने बॉलीवुड को भारत की सॉफ्ट पावर का प्रभावी माध्यम बताते हुए उसकी वैश्विक सांस्कृतिक भूमिका का विश्लेषण किया।
सत्र चार में 9 शोधपत्रों ने बौद्ध कूटनीति, पारंपरिक ज्ञान, पारिस्थितिक सॉफ्ट पावर और कौटिल्य के रणनीतिक चिंतन को समकालीन संदर्भों से जोड़ा।
दूसरे दिन “ चेंजिंग डाइमेंशन्ज आफ इंडिया’ज नैरेटिव डिप्लोमेसी ” विषयक पैनल में प्रो. एस. डी. मुनी, लेफ्टिनेंट कर्नल जे. एस. सोढ़ी (सेवानिवृत्त), डॉ. संपा कुंडू, प्रो. रामदास रुपावत, प्रो. (डॉ.) अलका पारिख, प्रो. सरोज कुमार वर्मा, डॉ. रवि रमेशचंद्र शुक्ल और डॉ. गिरिशंकर एस. बी. नायर ने बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत की रणनीतिक, सांस्कृतिक और डिजिटल कूटनीति पर विचार रखे। इस कार्यक्रम के मॉडरेटर डॉ अमित के सुमन रहे।
सत्र पांच में 12 शोधपत्रों के माध्यम से डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, भाषा-राजनीति, एआई और दुष्प्रचार की चुनौतियों पर चर्चा हुई।
सत्र छह में 8 शोधपत्रों ने हरित विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों और पाक-कूटनीति को भारत की ब्रांड छवि से जोड़ा।
सत्र सात में 11 शोधपत्रों ने मानवीय कूटनीति, समुद्री रणनीति, गठबंधन राजनीति और एआई नैतिकता पर विमर्श किया।
सत्र आठ ऑनलाइन मोड में आयोजित हुआ, जिसमें 50 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत हुए। इसमें बौद्ध और गांधीवादी नैतिक कूटनीति, प्रवासी नीति, यूपीआई के अंतरराष्ट्रीयकरण, इंडो-पैसिफिक रणनीति, लद्दाख व पूर्वोत्तर की सुरक्षा चुनौतियों तथा एआई-आधारित दुष्प्रचार जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
सम्मेलन के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) शोकीन चौहान और विशिष्ट अतिथि पूर्व राजदूत अशोक सज्जनहार ने अपने संबोधन में उन अनेक पहलुओं को छुआ जिनका तात्कालिक व दीर्घकालिक सरोकार भारत के साथ-साथ पूरे विश्व जगत के साथ जुड़ा है।
इसके पश्चात उत्कृष्ट शोध योगदानों को सम्मानित करने हेतु पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया।
पुरस्कार तीन श्रेणियों में प्रदान किए गए:
सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र पुरस्कार
(डॉ. मोहम्मद शहज़ाद, सुश्री देवराती मंडल, डॉ. बिजेत्री पाठक, पार्थ देबनाथ, डॉ. अमिता अरोड़ा)।
सर्वश्रेष्ठ स्नातकोत्तर शोधपत्र पुरस्कार : (सुश्री नेहा कुमारी, आशुतोष प्रसाद, प्रथमेेश कांबले, सुश्री अनामिका सिंह, डोना मार्टिन, मोहम्मद ज़ैद इरफान, संतोष कुमार साहू)।
इंटर्न श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र पुरस्कार दक्ष सिंह व सुरति चतुर्वेदी को दिया गया।

