Religion

देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू चातुर्मास में सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक, इस बार अधिक मास होने से चातुर्मास चार नहीं, पांच महीनों का होगा।

सावन 58 दिन का रहेगा। देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी (23 नवंबर) तक 148 दिन का फेस्टिवल सीजन रहेगा, जिसमें 97 दिन व्रत-त्योहार मनाए जाएंगे।

आज (29 जून) देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू हो गए हैं। चातुर्मास में सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक, ये चार महीने रहते हैं, लेकिन इस बार अधिक मास होने से चातुर्मास चार नहीं, पांच महीनों का होगा। 2023 से 19 साल पहले 2004 में सावन में अधिक मास था। इस कारण सावन 58 दिन का रहेगा। देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी (23 नवंबर) तक 148 दिन का फेस्टिवल सीजन रहेगा, जिसमें 97 दिन व्रत-त्योहार मनाए जाएंगे।
माना जाता है देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु विश्राम करते हैं। इस साल अधिक मास की वजह से विष्णु जी चार नहीं, पांच महीने विश्राम करेंगे। 4 जुलाई 2023 से शिव पूजा का महीना सावन शुरू होगा, जो कि 31 अगस्त तक रहेगा। 18 जुलाई से 16 अगस्त तक अधिक मास रहेगा। हिन्दी पंचांग के हर महीने में सूर्य संक्रांति रहती है यानी सूर्य राशि बदलता है, लेकिन अधिक मास में संक्रांति नहीं रहती है।

सवाल – चातुर्मास से जुड़ी धार्मिक मान्यता क्या है?

जवाब – चातुर्मास में एक ही जगह पर ठहरकर भक्ति, तप और ध्यान आदि पुण्य कर्म करने की परंपरा है, ये परंपरा खासतौर पर साधु-संतों से जुड़ी है। चातुर्मास में यात्रा करने से संत बचते हैं। इससे जुड़ी मान्यता ये है कि चातुर्मास का समय बारिश का रहता है। इन दिनों में नदी-नाले उफान पर रहते हैं, लगातार बारिश होती है। पुराने समय में बारिश की वजह से यात्रा के लिए साधन नहीं मिल पाते थे। इस कारण साधु-संत यात्रा नहीं करते थे और एक जगह ही रहते थे।

सवाल – चातुर्मास के 148 दिन में कितने दिन व्रत-त्योहार रहेंगे?

जवाब – चातुर्मास आज से शुरू होकर 23 नवंबर तक रहेगा। तब तक गुरु पूर्णिमा, अधिक मास (30 दिन), रक्षा बंधन, गणेश उत्सव (10 दिन), पितृ पक्ष (15 दिन), नवरात्रि (9 दिन), दीपोत्सव (5 दिन) सहित 97 व्रत-त्योहार आएंगे।

देवशयनी एकादशी और गुरु पूर्णिमा के बाद सावन शुरू होगा। सावन (4 जुलाई से 31 अगस्त) में दो-दो चतुर्थियां, एकादशियां, हरियाली अमावस्या के बाद 30 दिन का अधिक मास (18 जुलाई) शुरू होगा जो कि 16 अगस्त तक रहेगा। 17 अगस्त सावन का शुक्ल पक्ष शुरू होगा। इसमें नागपंचमी (21 अगस्त) और रक्षा बंधन (30 अगस्त) मनाए जाएंगे। इस तरह देवशयनी एकादशी और गुरु पूर्णिमा के बाद सावन में 39 दिन व्रत-त्योहार रहेंगे।

भादौ (अगस्त 31 से 29 सितंबर) में दस दिनों के गणेश उत्सव के साथ दो-दो तीज, चतुर्थियां, एकादशियां रहेंगी। अमावस्या और पूर्णिमा के साथ 18 दिन के व्रत-त्योहार रहेंगे।

आश्विन मास (30 सितंबर से 28 अक्टूबर) में 16 दिन का पितृ पक्ष, 9 दिन की नवरात्रि, दशहरा, पापांकुशा एकादशी, अमावस्या, शरद पूर्णिमा के साथ 29 दिन के व्रत-त्योहार रहेंगे।

कार्तिक मास (29 अक्टूबर से 27 नवंबर) में 5 दिनों का दीपोत्सव, करवा चौथ, दो-दो चतुर्थियां और एकादशियां, छठ पूजा के साथ 11 दिनों के व्रत-त्योहार रहेंगे। इस तरह 148 दिनों के फेस्टिवल सीजन में कुल 97 दिन व्रत-त्योहार मनाए जाएंगे।

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सवाल- चातुर्मास में कौन से योग-संयोग बन रहे हैं?

जवाब – इस बार सावन के दूसरे ही सोमवार पर सोमवती अमावस्या का शुभ संयोग बन रहा है। सातवें सोमवार को नागपंचमी और आखिरी सोमवार को प्रदोष व्रत रहेगा। इस साल भद्रा की वजह से राखी बांधने के लिए दिन में कोई मुहूर्त नहीं होगा। रात में 9 बजे ही रक्षाबंधन मनाया जा सकेगा।

इस बार शरद पूर्णिमा (28 अक्टूबर) पर आंशिक चंद्र ग्रहण रहेगा, जो कि भारत में दिखेगा। दीपावली से पहले खरीदी के लिए 5 नवंबर को दुर्लभ रविपुष्य योग बन रहा है।

सवाल- अधिक मास को मलमास क्यों कहते हैं?

जवाब- अधिक मास में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं। इस महीने में सूर्य संक्राति नहीं होती है। इस कारण इस महीने को मलिन माह यानी मलमास माना गया है। मल मास में नामकरण, यज्ञोपवित जैसे संस्कार भी नहीं किए जाते हैं।

सवाल – अधिक मास का नाम पुरुषोत्तम मास कैसे पड़ा?

जवाब – इस संबंध में प्रचलित कथा के अनुसार अधिक मास को शुभ नहीं माना जाता था। इस कारण कोई भी देवता इस महीने का स्वामी नहीं बनना चाहता था। तब अधिक मास ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। अधिक मास की प्रार्थना सुनकर विष्णु जी ने इस महीने को खुद का सर्वश्रेष्ठ नाम पुरुषोत्तम दिया। तब से इस माह को पुरुषोत्तम मास कहा जाने लगा। इस महीने में भागवत कथा पढ़ना-सुनना, मंत्र जप, पूजन, धार्मिक अनुष्ठान, दान आदि शुभ कर्म किए जाते हैं।

सवाल – चातुर्मास में खान-पान में क्या बदलाव करें?

जवाब – इन दिनों में बारिश होती है, बादलों की वजह से सूर्य देव के दर्शन नहीं होते हैं। धूप की कमी की वजह से हमारा डाइजेशन सिस्टम कमजोर हो जाता है।

चातुर्मास में नॉनवेज और मसालेदार खाने की मनाही है। ऐसी चीजों को खाने से बचना चाहिए, जो आसानी से पचती नहीं हैं। संतुलित खाना खाएं, जिसे पचाना शरीर के लिए आसान रहता है। ज्यादा ठंडा पानी पीने से बचें। एक बार पानी गर्म करके उसे ठंडा करें, इस पानी को पी सकते हैं।

कच्ची हरी पत्तेदार सब्जियां भी नहीं खानी चाहिए। बारिश और धूप की कमी की वजह से पत्तेदार सब्जियों में कीड़े लग जाते हैं। अगर कच्ची सब्जियां खाएंगे तो सेहत बिगड़ सकती है। सब्जियों को उबालकर खाएंगे तो बेहतर रहेगा।

सब्जियों के अलावा चातुर्मास में कच्चे दूध, दही, छाछ का सेवन करने से भी बचना चाहिए। दूध पीना हो तो गर्म करके पी सकते हैं।

चातुर्मास में थोड़े से शहद का सेवन रोज करेंगे तो सेहत के लिए फायदेमंद रहेगा। बारिश के दिनों में वात रोग होने की संभावनाएं रहती हैं। ऐसे में थोड़े से शहद का सेवन करेंगे तो वात रोग दूर हो सकते हैं। ध्यान रखें ज्यादा शहद का सेवन न करें।

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