जिला रजिस्ट्रार ने श्री कृष्ण आदर्श गौशाला, गोहाना के 25 सदस्यों की सदस्यता को अवैध ठहराते हुए सदस्यता को किया रद्द

गोहाना, (अनिल जिंदल) 14 मार्च । धर्मार्थ संस्था श्री कृष्ण आदर्श गौशाला सेवा समिति, देवी नगर, गोहाना से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले में जिला रजिस्ट्रार, फर्म्स एवं सोसायटीज़, सोनीपत द्वारा एक कड़ा और महत्वपूर्ण आदेश पारित किया गया है। विस्तृत सुनवाई और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद जिला रजिस्ट्रार हितेंद्र काद्यान ने वर्ष 2024 में बनाए गए 25 नए सदस्यों की सदस्यता को अवैध घोषित करते हुए “नूल्ल एंड वॉयड” करार दिया है। यह आदेश दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने, रिकॉर्ड की जांच करने और सोसायटी के संविधान, नियमों तथा उपविधियों का परीक्षण करने के बाद पारित किया गया है।
अधिवक्ता भूषण अग्रवाल ने बताया कि मामले के अनुसार वर्ष 2023 में सोसायटी के चुनाव संपन्न हुए थे। आरोप है कि चुनावों के बाद सोसायटी के कुछ पदाधिकारियों द्वारा संस्था के संविधान और नियमों की अनदेखी करते हुए वर्ष 2024 में 25 नए सदस्यों को मनमाने और कथित रूप से अवैध तरीके से शामिल किया गया। इन सदस्यो की सदस्यता को लेकर सोसायटी के कई सदस्यों के बीच असंतोष उत्पन्न हुआ, क्योंकि उनका कहना था कि सदस्य बनाने की प्रक्रिया में न तो पारदर्शिता बरती गई और न ही सोसायटी के उपविधियों में निर्धारित नियमों का पालन किया गया।
जिला रजिस्ट्रार के समक्ष दायर की गई याचिका -जब इन अनियमितताओं का मामला सामने आया, तब सोसायटी की गवर्निंग बॉडी के कुछ सदस्यों ने अधिवक्ता भूषण अग्रवाल के माध्यम से जिला रजिस्ट्रार, फर्म्स एवं सोसायटीज़, सोनीपत के समक्ष एक विस्तृत याचिका दायर की।
इस याचिका में संस्था के प्रबंधन द्वारा की गई कई गंभीर अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन की ओर ध्यान आकर्षित किया गया।
याचिका में लगाए गए प्रमुख आरोप
1. अवैध सदस्यता का आरोप-वर्ष 2024 में 25 नए सदस्यों को सोसायटी के नियमों और उपविधियों का पालन किए बिना मनमाने तरीके से सदस्य बनाया गया।
2. लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी-पिछले लगभग 5 वर्षों से संस्था की कोई विधिवत लोकतांत्रिक बैठक आयोजित नहीं की गई।सदस्यों का आरोप है कि न तो किसी सामान्य सभा की बैठक आयोजित की गई और न ही सदस्यों को बैठकों की कोई विधिवत सूचना दी जाती थी।
3. संस्था की कार्यवाही में पारदर्शिता का अभाव-यह भी आरोप लगाया गया कि संस्था के कई महत्वपूर्ण निर्णय कुछ सीमित व्यक्तियों द्वारा घर पर बैठकर किए जाते रहे, जिससे संस्था के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही समाप्त हो गई।
4. सरकारी अनुदान के उपयोग को लेकर सवाल-याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि सरकार द्वारा गौशाला के संचालन और गौसेवा के लिए दी जाने वाली अनुदान राशि (ग्रांट) का उपयोग भी पारदर्शी तरीके से नहीं किया जा रहा है और इसके उपयोग को लेकर सदस्यों को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती।
5. सोसायटी के संविधान और वैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन-सदस्यता प्रदान करने की प्रक्रिया में सोसायटी के संविधान, नियमों और संबंधित कानूनों में निर्धारित प्रावधानों की अवहेलना की गई।
मामले की सुनवाई और जांच-जिला रजिस्ट्रार, फर्म्स एवं सोसायटीज़, सोनीपत द्वारा इस मामले में दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों को सुना गया और संबंधित रिकॉर्ड तथा दस्तावेजों की गहन जांच की गई।
रिकॉर्ड के परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि वर्ष 2024 में बनाए गए 25 सदस्यों की सदस्यता प्रक्रिया सोसायटी के नियमों और निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी।
जिला रजिस्ट्रार का आदेश-सभी तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद जिला रजिस्ट्रार ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि—वर्ष 2024 में बनाए गए 25 सदस्यों की सदस्यता वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है, इसलिए इन सदस्यों की सदस्यता को “नूल्ल एंड वॉयड ” घोषित करते हुए तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है।
इसके अतिरिक्त आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि संस्था की कार्यप्रणाली में पाई गई अनियमितताओं को देखते हुए चार सदस्यों की सदस्यता को भी निलंबित (सस्पेंड) किया गया है, ताकि संस्था के प्रशासनिक ढांचे में संतुलन और निष्पक्षता बनी रहे।
सदस्यों की प्रतिक्रिया-गौशाला से जुड़े कई सदस्यों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने जिला रजिस्ट्रार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह आदेश संस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम है।
सदस्यों का कहना है कि इस आदेश से यह स्पष्ट संदेश गया है कि किसी भी धर्मार्थ संस्था में नियमों और कानूनों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से निर्णय नहीं लिए जा सकते।
भविष्य को लेकर उम्मीद-सदस्यों ने आशा व्यक्त की है कि इस निर्णय के बाद भविष्य में श्री कृष्ण आदर्श गौशाला सेवा समिति का संचालन पूर्णतः कानून, नियमों, उपविधियों और पारदर्शी प्रक्रियाओं के अनुरूप किया जाएगा, जिससे संस्था अपने मूल उद्देश्य—गौसेवा, समाजसेवा और धर्मार्थ कार्यों—को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ा सके।



