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गोहाना की कार्यकर्ता सभा में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सियासी टिप्पणियों की लगाई झड़ी ; द्वेष किसी से नहीं, पर साथ उसी का दूंगा जो होगा सही : बीरेंद्र सिंह

 

गोहाना :-27 दिसम्बर : मुझे किसी से भी द्वेष नहीं है, पर मैं केवल उसी का साथ दूंगा जो सही होगा, सही काम करेगा। बुधवार की दोपहर यह अहम टिप्पणी पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने की। कार्यकर्ता सभा में उन्होंने राजनीतिक टिप्पणियों की झड़ी लगा दी। वह बोले : 55 साल के सियासी जीवन में मैंने सिर्फ दोस्त बनाए। अगर कोई दुश्मन बना भी तो अपनी खुद की मर्जी से बना । बीरेंद्र सिंह जींद में आयोजित मेरी आवाज सुनो रैली की कामयाबी के लिए कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करने गोहाना आए। कार्यकर्ता सभा का संयोजन उनके सहयोगी प्रदीप चहल ने किया। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब मैं अपने लिए कुछ नहीं करूंगा, जो करूंगा, अपने कार्यकर्ताओं के लिए करूंगा। उन्होंने कहा कि मैं भी चाहता हूं कि मेरे दर्जन दो दर्जन साथी चुनाव लड़ें।

कार्यकर्ता बैठके में मुंडलाना पंचायत समिति के पूर्व चेयरमैन इंद्र सिंह सहरावत, सोनीपत जिला परिषद के जिला पार्षद जय सिंह मलिक और राष्ट्रहित मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मबीर गौड़ भी पहुंचे। इस अवसर पर घोषणा की गई कि पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे और हिसार के सांसद बृजेंद्र सिंह मकर संक्रांति पर 14 जनवरी को छतैहरा गांव में दीनबंधु चौ. छोटूराम की प्रतिमा का अनावरण करेंगे।

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पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब वह कांग्रेस में थे, उन्हें पूरा सम्मान मिला। पहले राजीव गांधी, उनके बाद सोनिया गांधी ने उनके अच्छे सुझावों पर अमल किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने भी उनको पूरी इज्जत दी। उन्होंने साथ में जोड़ा कि जो मेरी बात को गंभीरता से लेगा, मैं उसी का साथ दूंगा। उनके अनुसार नेताओं का यह दंभ गलत है कि कोई दूसरा योग्य ही नहीं है, जो करना है, मुझे ही करना है।

बीरेंद्र सिंह ने जोर दे कर कहा कि खिलाड़ियों के संगठनों की व्यवस्था उन्हीं के हाथों में होनी चाहिए जो खुद खिलाड़ी हों। उन्होंने आपत्ति की कि खिलाड़ियों के संगठनों पर नेताओं, अफसरों और पूंजीपतियों का कब्जा है। उन्होंने खुल कर कहा कि कुश्ती संगठन को भंग करने का जो काम अब किया गया है, वह 6 महीने पहले हो जाना चाहिए था ।

पूर्व केंद्रीय मंत्री बोले कि महिलाओं को 50 या 33 प्रतिशत आरक्षण से ज्यादा जरूरत आर्थिक आत्मनिर्भरता की है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनने का लक्ष्य हासिल भी कर लिया, पर 57 प्रतिशत संसाधनों पर अब की तरह केवल एक फीसदी आबादी का
कब्जा बना रहा, तब आम आदमी को कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने जोर दे कर कहा कि पैसे के लिहाज से जनता इतनी मजबूत होनी चाहिए कि उसे किसी के आगे हाथ न फैलाने पड़ें।

इस अवसर पर दलबीर फौगाट, धर्मबीर छतैहरा, रमेश लाठ, सुरेंद्र नाथ, सचिन दहिया, राम बिलास चहल, सिकंदर गंगाणा, राम मेहर बुसाना आदि भी मौजूद रहे।

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