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महिला विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आगाज

भारतीय वेद पढ़ कर दुनिया ने किए अनुसंधान : डॉ. कोठारी

गोहाना :-30 नवम्बर : बी. पी. एस. महिला विश्वविद्यालय के प्रबंधन विभाग में गुरुवार को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आगाज हो गया । “उच्च शिक्षा में स्वदेशी ज्ञान प्रणाली को एकीकृत करना” विषय पर आधारित दो दिवसीय इस कॉन्फ्रेंस को सेंटर फॉर इंडियन थॉट्स एंड मैनेजमेंट एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

डॉ अतुल कोठरी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा बहुत ही प्राचीन है, पर भारत से ज्यादा योग केंद्र अमेरिका व इंग्लैंड में हैं। आज के दिन दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती मानसिक स्वास्थ्य की है। उन्होंने कहा कि भारत ने दनिया को गिनती सिखाई। भारतीय वेद पढ़ कर दुनिया ने अनुसंधान किए है। पूरा विश्व एक परिवार है यह केवल भारत की धारणा है।

अध्यक्षता वी.सी. प्रो सुदेश ने की जबकि शुभारम्भ सत्र में बतौर मुख्य अतिथि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी पहुंचे। मुख्य वक्ता गुरु घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर छतीसगढ़ के वी.सी. प्रो आलोक चक्रवाल, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, तिरुचिरापल्ली के निदेशक प्रो पवन कुमार विशिष्ट अतिथि के हरियाणा उच्च शिक्षा परिषद के चेयरमैन प्रो. के. सी. शर्मा थे।

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प्रो. आलोक चक्रवाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्पर महान है। अच्छे अनुसंधान के लिए संस्कृत जरूर पढ़े। विदुर नीति प्रबंधन सिद्धांत की सर्वश्रेष्ठ नीति है। हमें समय निकाल कर भारतीय ज्ञान परम्परा को पुस्तकें पढ़नी चाहिए। प्रो. पवन कुमार ने कहा कि हमारे संवाद की भाषा बहुत ही सरल और सहज होनी चाहिए। प्रो पवन ने सात भाषाओं के फार्मूले पर जोर दिया। प्रो. के. सी. शर्मा ने कहा कि बौद्धिक शक्ति, लक्ष्मी और शिक्षा का स्त्रोत देवी रूपा महिला ही है

वी. सी. प्रो सुदेश ने कहा कि उच्च शिक्षा में स्वदेशी ज्ञान प्रणाली को एकीकृत करने के लिए यह उपयुक्त समय है। स्वदेशी ज्ञान को समझना शिक्षक के लिए बहुत जरूरी है। इस अवसर पर रजिस्ट्रार डॉ नीलम मलिक भी मौजूद रहीं।

कॉन्फ्रेंस की संयोजक प्रो इप्शिता बंसल के अनुसार इस कॉन्फ्रेंस में जम्मू कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के प्रतिभागी भाग ले रहे है।

 

 

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