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भारत से बढ़ेगा सहयोग, जापान एजुकेशन-स्किल डेवलपमेंट सेल की स्थापना 

एसजीटीयू व इंडो जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स के बीच एमओयू का दिखेगा दूर तक असर

 

गुरुग्राम, (अनिल जिंदल) 11 मई। एसजीटी विश्वविद्यालय ने अपने अंतरराष्ट्रीयकरण अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए जापान एजुकेशन एंड स्किल डेवलपमेंट सेल (जेईएसडीसी) का उद्घाटन किया। यह पहल एसजीटी विश्वविद्यालय और इंडो जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईजेसीसी) के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत रणनीतिक सहयोग से विकसित की गई। इस पहल का उद्देश्य भारत और जापान के बीच शैक्षणिक सहयोग, कौशल विकास तथा सांस्कृतिक आदान- प्रदान को मजबूत करना है। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) हेमंत वर्मा ने की।

उन्होंने कहा कि वैश्विक शैक्षणिक साझेदारियां छात्रों को प्रतिस्पर्धी और आपस में जुड़े विश्व के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संरचित सहयोग छात्रों के लिए भविष्य उन्मुख अवसरों के निर्माण में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।

इस अवसर पर जापान की प्रतिष्ठित संस्थाओं एवं संगठनों से आए विशिष्ट प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रमुख वक्ताओं में इंडो जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन राहुल मिश्रा, जेट्रो के चीफ डायरेक्टर जनरल ताकाशी सुजुकी, द जापान फाउंडेशन के डायरेक्टर जनरल कोजी सातो, एनएसडीसी में प्रतिनियुक्त जिका विशेषज्ञ कुरियामा अकीरा तथा जेसीसीआईआई के सीनियर गवर्नमेंट लायजन ऑफिसर टोमोया मियामोटो शामिल रहे।

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अपने संबोधन में राहुल मिश्रा ने कहा कि भारत और जापान एक-दूसरे के पूरक साझेदार हैं तथा जापान में कुशल भारतीय पेशेवरों की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने संस्थागत एवं औद्योगिक साझेदारियों को मजबूत करने में आईजेसीसी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पहल संरचित सहयोग, भाषा दक्षता और सांस्कृतिक समझ के माध्यम से वैश्विक करियर के नए द्वार खोलेगी।

ताकाशी सुजुकी ने भारत में जापानी कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति का उल्लेख करते हुए लोगों के बीच संपर्क और आदान-प्रदान को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भाषा शिक्षा को सांस्कृतिक समझ और कौशल विकास के साथ जोड़ना उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

कोजी सातो ने जापानी भाषा शिक्षा के प्रति वैश्विक स्तर पर बढ़ती रुचि का उल्लेख करते हुए सांस्कृतिक जागरूकता, संरचित शिक्षण और शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका की सराहना की।

कुरियामा अकीरा ने इस पहल को भारत-जापान प्रतिभा गलियारे के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक करियर अवसरों तक पहुंच के लिए भाषा दक्षता और सांस्कृतिक समझ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

टोमोया मियामोटो ने कहा कि जापानी भाषा कौशल छात्रों को विनिर्माण, अनुसंधान और व्यापार जैसे क्षेत्रों में विशेष अवसरों तक पहुंच प्रदान करता है। उन्होंने इस सेल को अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं पेशेवर एक्सपोजर का माध्यम बताया।

यह पहल एसजीटी विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर फॉरेन लैंग्वेजेज और ऑफिस ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस द्वारा इंडो जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स के सहयोग से संयुक्त रूप से विकसित की गई है।

Khabar Abtak

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