1857 की क्रांति की वीरांगना थीं उदा देवी पासी : डॉ. सुरेश सेतिया
गोहाना :-16 नवम्बर : उदा देवी पासी 1857 की क्रांति की वीरांगना थीं। यह टिप्पणी गरुवार को वार्ड नंबर 22 की रविदास चौपाल में आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे के निदेशक डॉ. सुरेश सेतिया ने की। वह उनके 166 वें बलिदान दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। डॉ. सुरेश सेतिया गुरु रविदास चौपाल सभा द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में बतौर मुख्य वक्ता पहुंचे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर पार्षद बबली देवी ने की तथा संयोजन आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे के मुख्य संरक्षक आजाद सिंह दांगी ने की।
उन्होंने कहा कि उदा देवी पासी अत्यन्त शक्तिशाली दलित महिला थीं। उन्होंने अपने पति मक्का पासी की शहादत का बदला लेने की कसम खाई थी। वह 16 नवंबर 1857 को लखनऊ के सिकंदर बाग में जब अंग्रेजों से घिर गईं, उन्होंने एक साथ 36 अंग्रेजों को मौत के घाट उतार कर स्वयं मृत्यु का वरण किया था।
इस अवसर पर सतबीर पौडिया, राज सिंह सिंधु, नरेश सिंधु, विनोद रंगा, वेद पाल, जय नारायण, भारत भूषण क्षेत्रपाल, मुखत्यार सिंह दांगी आदि भी उपस्थित रहे।


