फसलों के अवशेष जलाने से भूमि में कम हो रहा है ऑर्गेनिक कार्बन

गोहाना :- फसलों के अवशेष जलाने से भूमि में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा कम हो रही है। आग से पौधे को पोषण देने वाले माइक्रो न्यूट्रिएंट विघटित हो रहे हैं। इसका असर फसल की पैदावार पर पड़ेगा। कृषि अधिकारियों के अनुसार लगातार आग लगाने की घटनाओं से धीरे-धीरे मिट्टी में फसल का जमाव होना बंद हो जाएगा। ऐसे में मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को जागरूक कर रहे हैं। क्षेत्र में धान की कटाई हो रही है। ज्यादातर किसान इसको मशीनों से करा रहे हैं, जिससे एक से दो फीट फसल अवशेष बच जाते हैं।
किसान अवशेषों में आग लगा देते हैं। इससे वायु प्रदूषण के साथ मिट्टी को भी नुकसान हो रहा है। हालांकि सरकार ने फसल अवशेष जलाने पर प्रतिबंध लगाया है। इसको रोकने के लिए प्रशासनिक व कृषि विभाग के अधिकारियों की ड्यूटी तक लगी हुई है। साथ ही सेटेलाइट से भी खेतों की निगरानी की जा रही है। इसके बावजूद घटनाएं बंद नहीं हो रही। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार स्वास्थ मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा 1.72 होती है। विभागीय रिपोर्ट अनुसार फसल अवशेष जलाने से मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा घट रही है। ऑर्गेनिक कार्बन पौधे की बढ़ोतरी और पैदावार को प्रभावित करता है।
फसल अवशेष जलाने की हुई 14 घटनाएं फसल अवशेष जलाने की घटनाओं के आधार पर कृषि विभाग मुख्यालय ने उपमंडल के 14 गांव को यलो जोन में रखा है। उपमंडल में अब तक फसल अवशेष जलाने की 14 घटनाएं हो चुकी हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों ने इनमें से 10 घटनाओं में किसानों पर जुर्माना किया है।
फसल अवशेष जलाने से मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा कम हो जाती है। इसका असर फसल की पैदावार पर पड़ता है। मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा को संतुलित रखने के लिए किसान जैविक खाद का प्रयोग करें। किसान फसल अवशेषों की खेत में ही जुताई कर दें। इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बनी रहेगी।
-डॉ. राजेंद्र मेहरा, एसडीओ, कृषि विभाग, गोहाना


