बी. पी. एस. महिला विश्वविद्यालय में सी.एस.आई.आर. की निदेशक ने साइंस कॉन्क्लेव में किया खुलासा ; वास्को डी गामा ने भारत नहीं, भारत का समुद्री रास्ता खोजा था
गोहाना:- 6 नवम्बर: बी. पी. एस. महिला विश्वविद्यालय के बेसिक एंड एप्लाइड साइंस विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय साइंस कॉन्क्लेव का सोमवार को शुभारम्भ हो गया । रोल ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इन सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड ह्यमन वेलफेयर” विषय पर आयोजित इस साइंस कॉन्क्लेव को हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग प्रायोजित कर रहा है। साइंस कॉन्क्लेव की अध्यक्षता वी. सी. प्रो सुदेश ने की। मुख्य अतिथि सी.एस.आई.आर. की फाउंडर निदेशक प्रो रंजना अग्रवाल रहीं। मुख्य वक्ता एम.डी.यू. के प्रो. एस. पी. खटकड़ रहे।
डॉ रंजना अग्रवाल ने कहा कि हमारी बेटियां आने वाले समय में साइंस एवं प्रौद्योगिकी में देश की दशा व दिशा बदलने वाली है। पूर्व में हमारा समाज वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही चलता था तथा वैदिक परम्परा समाज के साथ मिलकर ज्ञान को विकसित करने की थी। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि वास्को डी गामा ने 1498 में भारत में आने के समुद्री मार्ग की खोज की थी भारत की खोज नहीं । भारत की संस्कृति तो बहुत ही प्राचीन है। भारत को विदेशी ताकतों ने अपने लाभ के लिए प्रयोग किया है। उन्होंने कहा कि हमारी एग्रीकल्चर साइंस बहुत ही उपयोगी है। हमारे किसान किसी साइंटिस्ट से कम नहीं है। आजादी के समय हमारा खाने का अनाज विदेशों से आता था। अब भारत आधे विश्व का पेट भर रहा है।
प्रो. एस. पी. खटकड़ ने कहा कि दो देशों की दूरी हवाई जहाज के द्वारा विज्ञान ने कम की, मशीनों का निर्माण कर इंसान का काम आसान किया, दवा का निर्माण कर लोगों को स्वास्थ्य लाभ दिया तो विज्ञान ने ही परमाणु जैसा महा विनाशक निर्माण किया है। वी. सी. प्रो सुदेश ने कहा कि हमारी बेटियों में प्रतिभा की कमी नहीं है। आज हर क्षेत्र में हमारी बेटियां खुद को साबित कर रही है। इस अवसर पर रजिस्ट्रार डॉ नीलम मलिक भी मौजूद रहीं।


