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देश के 10वें राष्ट्रपति के. आर. नारायणन की 133वीं जयंती पर किया गया नमन

कच्ची झोपड़ी में जन्मे, अभावों से जूझते हुए बने राष्ट्रपति नारायणन

गोहाना :-27 अक्तूबर : के. आर. नारायणन का जन्म एक कच्ची झोपड़ी में हुआ। अभावों से जूझते तथा उनसे लोहा लेते हुए वह देश के सबसे बड़े पद पर पहुंचे तथा देश के 10वें राष्ट्रपति बने । शुक्रवार को यह टिप्पणी आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे के संरक्षक आजाद सिंह दांगी ने की। आजाद सिंह दांगी रविदास धर्मशाला में नारायणन की 133वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे। अध्यक्षता रविदास समाज संगठन के अध्यक्ष सतबीर सिंह पौडिया ने की।

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आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे के मुख्य संरक्षक ने कहा कि के. आर. नारायणन अपने बचपन में 15 किलोमीटर पैदल चल कर स्कूल में पहुंचते थे। फीस न चुकाने से उन्हें कक्षा से बाहर निकाल दिया जाता था। तब वह क्लास से बाहर खड़े रह कर सुनते थे। उनके पास किताबें खरीदने के लिए भी पैसे नहीं होते थे। वह दोस्तों से उधार मांग कर किताबों से अपनी पढ़ाई करते थे। पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी तथा एक दिन देश के राष्ट्रपति बन गए। इस अवसर पर रमेश मेहता, ब्रह्मदत्त राठी, धर्मबीर बामनिया, नारायण सिंहमार, सरोज देवी, नेहा, सुमन, मोनिका, सुनीता आदि भी मौजूद रहे।

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