व्यक्तिगत मतदाता अब पूरी अवधि में अधिकतम 10 और मतदाता सूची के निरंतर अपडेट के दौरान प्रतिमाह 5 ही दाखिल कर सकेंगे फॉर्म-7 आवेदन : डीईओ नेहा सिंह
भारत निर्वाचन आयोग ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से फॉर्म-7 आवेदन दाखिल करने की संख्या की निर्धारित, निराधार आपत्तियों पर लगेगी रोक

सोनीपत, 27 अक्टूबर। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त नेहा सिंह ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में नाम शामिल करने पर आपत्ति दर्ज कराने अथवा किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए प्रपत्र-7 (फॉर्म-7) आवेदन दाखिल करने के संबंध में महत्वपूर्ण हिदायतें जारी की हैं। आयोग ने व्यक्तिगत मतदाताओं द्वारा बड़ी संख्या में निराधार आपत्तियां दर्ज कराने की प्रवृत्ति को रोकने तथा मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाने के उद्देश्य से ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से आवेदन दाखिल करने की अधिकतम संख्या निर्धारित की है।
उन्होंने बताया कि आयोग के निर्देशानुसार, दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराने की निर्धारित अवधि के दौरान कोई भी व्यक्तिगत मतदाता अधिकतम 10 फॉर्म-7 आवेदन दाखिल कर सकता है। वहीं, मतदाता सूची के निरंतर अद्यतन की अवधि में एक व्यक्तिगत मतदाता द्वारा प्रति माह अधिकतम 5 फॉर्म-7 आवेदन ही दाखिल किए जा सकेंगे। ये सीमाएं ऑनलाइन और भौतिक यानी ऑफलाइन माध्यम से प्रस्तुत किए जाने वाले आवेदनों पर समान रूप से लागू होंगी।
निराधार और सामूहिक आपत्तियों पर रहेगी नजर
उपायुक्त नेहा सिंह ने बताया कि निर्वाचन आयोग के संज्ञान में ऐसे मामले आए हैं, जिनमें व्यक्तिगत मतदाताओं द्वारा बिना पर्याप्त आधार के बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज कराई जाती हैं। इससे संबंधित मतदाताओं को अनावश्यक असुविधा होती है और बूथ स्तर के अधिकारियों सहित निर्वाचन कार्य में लगे कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ता है। आयोग के निर्देशों का उद्देश्य ऐसी स्थिति पर नियंत्रण लगाना और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया को पारदर्शी एवं नियमों के अनुरूप बनाना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 13(2) के अनुसार, फॉर्म-7 आवेदन वही व्यक्ति दाखिल कर सकता है, जिसका नाम संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज हो। किसी मतदाता का नाम हटाने अथवा नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए निर्धारित प्रपत्र और प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। व्यक्तिगत मतदाता द्वारा सामूहिक रूप से प्रस्तुत किए गए दावों एवं आपत्तियों पर मतदाता सूची नियमावली, 2023 के प्रावधानों के अनुसार विचार नहीं किया जाएगा।
फॉर्म-7 में पूरी जानकारी और मूल हस्ताक्षर जरूरी
जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) यह सुनिश्चित करेंगे कि फॉर्म-7 में सभी आवश्यक विवरण सही तरीके से भरे गए हों और आपत्तिकर्ता ने निर्धारित स्थान पर अपने मूल हस्ताक्षर किए हों। हस्ताक्षर की मुहर को मूल हस्ताक्षर का विकल्प नहीं माना जाएगा। साथ ही, मतदाता सूची में उपलब्ध विवरणों से मिलान करके आवेदनकर्ता की प्रामाणिकता की जांच भी की जाएगी।
उन्होंने बताया कि यदि किसी आपत्ति का निपटारा प्रारंभिक स्तर पर नहीं हो पाता है, तो नियमानुसार आपत्तिकर्ता को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से सुना जाएगा। प्रत्येक फॉर्म-7 के संबंध में बयान अलग-अलग दर्ज किए जाएंगे और आपत्ति की वैधता की जांच की जाएगी। किसी मतदाता का नाम हटाने का आदेश पारित करने से पहले संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का उचित अवसर देना भी आवश्यक होगा।
झूठी शिकायत मिलने पर होगी नियमानुसार कार्रवाई
उपायुक्त नेहा सिंह ने कहा कि यदि जांच के दौरान कोई शिकायत झूठी पाई जाती है, तो जानबूझकर गलत बयान या घोषणा देने वाले आवेदक के विरुद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 सहित लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों, सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों तथा अन्य फील्ड स्तर के अधिकारियों को निर्वाचन आयोग के निर्देशों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे मतदाता सूची से संबंधित आपत्तियां दर्ज कराते समय सही जानकारी दें, निर्धारित नियमों का पालन करें और केवल उचित आधार होने पर ही फॉर्म-7 आवेदन प्रस्तुत करें, ताकि निर्वाचन प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और सुचारु रूप से संचालित हो सके।



