‘भारत ही बनेगा विश्व के भविष्य का आधार’ एसजीटीयू में तीन दिवसीय ‘सिनर्जी-ज्ञानोत्सव-2026’ का भव्य शुभारंभ
'जय अनुसंधान' ने देश के वर्तमान व भविष्य को स्वर्णिम बनाया


गुरुग्राम, 06 अप्रैल । भारत हर क्षेत्र में जिस तेजी आगे बढ़ रहा है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि दुनिया के भविष्य का आधार भारत ही बनेगा। शिक्षा पर सबसे अधिक खर्च भारत कर रहा है। छात्रों को फ्यूचर का इंतजार नहीं करना बल्कि फ्यूचर को तैयार करना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘जय अनुसंधान’ के संदेश ने भारत के वर्तमान और भविष्य को स्वर्णिम बना दिया है।
ये विचार आज श्री गुरु गोबिंद सिंह ट्राईसेंटेनरी यूनिवर्सिटी (एसजीटीयू) के ‘सिनर्जी-ज्ञानोत्सव-2026’ कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि एवं विशेष अतिथि ने अपने संबोधन में व्यक्त किए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं सिस्टोपिक लेबोरेट्रीज प्रा. लि. के प्रबंध निदेशक पी. के. दत्ता ने कहा कि भारत में ट्रांसफार्मेशन के दो दौर आए। पहला दौर राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में कंप्यूटरीकरण का था। दूसरा दौर आर्थिक उदारीकरण का आया जब मनमोहन सिंह भारत के वित्त मंत्री थे। कंप्यूटरीकरण का शुरू में घोर विरोध हुआ था और आर्थिक उदारीकरण को भी सहज रूप में स्वीकार नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि आज कंप्यूटर के बिना कोई व्यवस्था नहीं चल सकती। आर्थिक मोर्चे पर भारत की विकास गति से दुनिया अचंभित हैं।
पी. के. दत्ता ने ‘सिनर्जी-ज्ञानोत्सव-2026’ पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मैंने 10-12 स्टॉल्स का निरीक्षण किया और पाया कि इनोवेशन,ज्ञान, ऊर्जा से भरपूर छात्र और अध्यापक व्यवस्था के ट्रांसफार्मेशन के लिए एकदम तैयार हैं। उन्होंने कहा कि ‘थॉट’ को ‘थॉट’ तक ही सीमित न रहने दें, उसे नेक्स्ट स्टैंडर्ड तक लेकर जाएं। बेस्ट को एक्सेलेंट तक लेकर जाएं।
उन्होंने एसजीटीयू को फ्यूचर की यूनिवर्सिटी कहा।
*आइडिया को इनोवेशन और नॉलेज को सोल्यूशन*
एमक्योर फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, (कॉर्पोरेट अफेयर्स) चेतन गुप्ता कार्यक्रम में विशेष अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि आइडिया को इनोवेशन और नॉलेज को सोल्यूशन में बदलने की कला ही सिनर्जी है। एकेडमिक रिसर्च और इंडस्ट्रियल कोलेबोरेशन का फासला घट रहा है। भारत विश्व का फार्मेसी हब बन रहा है। इनोवेशन और अनुसंधान के लिए केंद्र सरकार खुल कर मदद और सहयोग दे रही है। पिछले पांच साल में उसने एक लाख करोड़ की सहायता दी। अकेले इसी वित्त वर्ष (2025-26) में उसने 25 हजार करोड़ की सहायता रिसर्च एवं इनोवेशन के लिए दी।
चेतन गुप्ता ने कहा कि एआई, एमएल का सब जगह असर दिखाई दे रहा है। सिंप्टम दिखने से पहले बीमारी का पता लग रहा है। चेतन गुप्ता ने मीरा नाम की रिसर्चर की प्रेरणादायक स्टोरी भी शेयर की जिसने तमाम बाधाओं को पार करते हुए शुगर रोगियों के लिए एग्री-वेस्ट से बैंडेज बनाई जिसकी कीमत 60 रुपये से भी कम है। पहले इसके लिए 1200 से 1500 रुपये खर्च करने पड़ते थे।
‘ *फ्यूचर रेडी सॉल्यूशंस’* इसससे पहले भविष्य के लिए तैयार समाधान की झलक दिखाने, उन पर शोध के विजन के साथ एसजीटीयू के वर्ष के सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्यक्रम ‘सिनर्जी-ज्ञानोत्सव-2026’ का ऊर्जा, मेधा व उत्साह से भरपूर कार्यक्रम के साथ शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय इस महाआयोजन में इनोवेशन, रिसर्च व ट्रांसफोर्म के विविध आयामों, पहलुओं, व्यावहारिक उपयोगिताओं एवं प्रासंगिकताओं पर चर्चाओं की शुरुआत हुई। अनुसंधान, डिस्प्ले के माध्यम से विभिन्न स्टॉल्स पर ‘फ्यूचर रेडी सॉल्यूशंस’ प्रदर्शित किए गए। उल्लेखनीय पहलू यह भी रहा कि सभी स्टॉल्स टीचिंग स्टाफ द्वारा लगाए गए थे। सिनर्जी के अब तक आठ एडिशन हो चुके। इस बार पहली बार फैकल्टी फैकल्टी एडिशन आयोजित हो रहा है।
‘ **सिनर्जी-ज्ञानोत्सव-2026’के अहम बिंदु-*
• सरकारी प्रतिबद्धताएं, राष्ट्रीय प्राथमिकताएं और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास गोल (एसजीडी)
• टेक होराइजन, शेपिंग टुमारो’ज वर्ल्ड, एआई,एमएल,ब्लॉक चेन, बिग डाटा
• एआई इन हेल्थकेयर, फ्रॉम इलनेस टु वेलनेस, एआई ड्रिवन हेल्थकेयर एंड डायग्नोस्टिक
• अर्थ फर्स्ट -कॉल बार सस्टेनेबिलिटी, क्लाइमेट एंड इको एनर्जी
• सोसायटी का सशक्तिकरण – विकास टूरिज्म एंड कल्चरल हेरिटेज से।
एसजीटीयू के प्रबंध ट्रस्टी मनमोहन सिंह चावला ने कार्यक्रम मुख्य अतिथि पी. के. दत्ता व विशेष अतिथि चेतन गुप्ता का सम्मान किया।
प्रो. (डॉ.) हेमंत वर्मा कुलपति ने स्वागत भाषण दिया एवं उद्घाटन संबोधन प्रो. (डॉ.) अतुल नासा प्रो वाइस चांसलर एवं चेयरमैन, ‘सिनर्जी’ ने दिया।
डॉ. भारती रैना संयोजक, केंद्रीय समन्वय प्रकोष्ठ, एसजीटी विश्वविद्यालय ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।



