उत्तर भारत के राजनीतिक बदलाव का दस्तावेज
सियासत में वंशवाद से हटकर राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव के भाजपा के सफरनामे पर सटीक टिप्पणी करती वरिष्ठ पत्रकार सुशील मानव की पुस्तक

गुरुग्राम, (अनिल जिंदल) । भाजपा ने हरियाणा और उत्तर भारत के बड़े हिस्से के सियासी परिदृश्य को बदल दिया है। दशकों पुराने वंशवादी प्रभुत्व और जातीय समीकरणों को तोड़ा है और 1972 के बाद लगातार दो बार किसी भी दल को पूर्ण बहुमत न मिलने की परंपरा को समाप्त किया है। पार्टी के सियासी सफरनामे को एक नई पुस्तक में विस्तार से संजोया गया है। यह भागीरथी प्रयास किया है हरियाणा की राजनीति पर पैनी नजर रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘द ट्रिब्यून’ के पूर्व राज्य ब्यूरो चीफ सुशील मानव ने।
अपनी पुस्तक “बियांड डाइनेस्टीज: भारतीय जनता पार्टी’ज ट्रांसफोर्मेटिव सर्ज इन हरियाणा एंड अदर नार्थ इंडियन स्टेट्स” में
सुशील मानव ने हरियाणा को केंद्र में रखकर यह समझाने का प्रयास किया है कि किस प्रकार भाजपा ने 2014, 2019 और 2024 में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर तीन लगातार कार्यकालों तक सरकार बनाकर वंशवाद के पैटर्न को तोड़ा।
लगभग चार दशकों की जमीनी पत्रकारिता, लोकनीति-सीएसडीएस सर्वेक्षण आंकड़ों और व्यापक फील्डवर्क के आधार पर मानव बताते हैं कि परिवार नियंत्रित राजनीति से हटकर विचारधारा आधारित राजनीति, पारदर्शी भर्तियां, युवाओं और महिलाओं को लक्षित कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ, डिजिटल रणनीति और सूक्ष्म स्तर तक संगठनात्मक सक्रियता उभरी—पहले मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में और अब नायब सैनी के नेतृत्व में हरियाणा में।
पुस्तक में चर्चा का विस्तार उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गैर-यादव ओबीसी वर्गों के एकीकरण, पंजाब में आप-भाजपा के शहरी संघर्ष, उत्तराखंड के विकास-केंद्रित एजेंडे और दिल्ली की बदलती राजनीतिक संरचना तक किया गया है।
जातीय तनाव और बेरोजगारी जैसी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए भी पुस्तक भाजपा के उदय को भारतीय लोकतंत्र में एक संरचनात्मक परिवर्तन के रूप में प्रस्तुत करती है—जहां क्षेत्रीय दबंग नेताओं से आगे बढ़कर आकांक्षाओं और व्यापक सामाजिक गठबंधनों की राजनीति उभर रही है।
सुशील मानव, जो 1997 से 2021 तक ‘द ट्रिब्यून’ से जुड़े रहे और 2023 से ‘द प्रिंट’ के साथ हैं, ने क्षेत्र की उथल-पुथल भरी राजनीति को वर्षों तक कवर किया है। उनके सहयोगियों और प्रेक्षकों ने इस पुस्तक को समकालीन राजनीतिक बदलावों को समझने में एक निष्पक्ष और तथ्य-आधारित योगदान बताया है।
वह दो वर्ष (2021 से 2023 तक) गुरुग्राम स्थित एसजीटी यूनिवर्सिटी में मास कम्युनिकेशन विभाग के डीन के पद पर भी रहे।
मनोहर पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक अमेजन और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है।


