कोहला गांव में तेल सप्लाई के लिए पाइप लाइन बिछाने का काम भारी विरोध के बीच हुआ शुरू, विरोध करने पर 24 किसानों ( महिलाओं और पुरुषों ) को लिया हिरासत में, जिन्हे बाद में छोड़ा दिया गया

गोहाना :-5 नवम्बर : इंडियन तेल कंपनी द्वारा गुजरात से पानीपत रिफाइनरी में तेल की सप्लाई पहुंचाने के लिए बरोदा हलके के लगभग 80 गांवों के खेतों से पाइप लाइन बिछाई जा रही है। काफी गांवों में पाइप लाइन बिछाई जा चुकी है। किसान पाइप लाइन बिछाने पर मार्केट रेट के अनुसार मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं जबकि कंपनी द्वारा कलेक्टर रेट के अनुसार मुआवजा दिया जा रहा है। कोहला गांव में किसानों ने पाइप लाइन बिछाने के विरोध में धरना दे रखा है जोकि तीन अगस्त से लगातार गांव कोहला में जारी हैं। किसानों और अधिकारियों के बीच कई बार बातचीत हो चुकी है लेकिन किसान उचित मुआवजा देने की मांग पर अड़े हुए हैं। पिछले सप्ताह भी तेल कंपनी के अधिकारी प्रशासन के अधिकारियों के साथ भारी संख्या में पुलिस बल के साथ धरनास्थल पर पहुंचे थे। तब किसानों ने डी.सी. से बातचीत के लिए समय मांगा था।
मंगलवार को फिर से तेल कंपनी के अधिकारियों ने काम शुरू करवाने के लिए प्रशासन से सहयोग मांगा।इस पर मंगलवार को प्रशासन ने भारी पुलिस दल बल को साथ लेकर गांव कोहला में तेल सप्लाई के लिए जबरदस्ती पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया। किसानों ने शुरुआत में काम शुरू करवाने पर भारी विरोध किया। जिसके बाद 16 महिलाओं और आठ पुरुषों को हिरासत में ले लिया गया। उनको बस में बैठाकर कुछ दूरी पर पर ले जाया गया। इसी दौरान पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू करवाया गया।लगभग तीन-चार घंटे बाद उनको छोड़ दिया गया।
भारतीय किसान कामगार अधिकार मोर्चा के अध्यक्ष सितेंद्र लोहचब ने कहा कि सरकार किसानों की जायज मांगों को बिना पूरा करवाए पुलिस प्रशासन के दबाव में काम करवाना चाहती है। बुधवार को किसान महापंचायत कर आगामी निर्णय लेंगे। भारतीय किसान यूनियन के युवा प्रदेश अध्यक्ष रवि आजाद ने कहा कि किसानों की जायज मांगों पर बातचीत कर प्रशासन और सरकार को समाधान की तरफ बढ़ना चाहिए।
इस कार्यवाही में तेल कंपनी के अधिकारी. ए.सी.पी. ऋषिकांत, नायब तहसीलदार अभिमन्यु भारी संख्या में पुलिस बलों के साथ मशीनें लेकर काम शुरू करवाने के लिए गांव कोहला पहुंचे थे । अधिकारियों ने किसानों को काम शुरू करने के लिए समझाया लेकिन वे मार्केट रेट के अनुसार ही मुआवजा देने की मांग पर अड़े रहे।
ए.सी.पी. ऋषिकांत ने कहा कि तेल कंपनी के अधिकारियों ने काम शुरू कराने के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। अधिकारियों ने किसानों को समझाया लेकिन कुछ ने काम करने का विरोध किया। उनको हिरासत में लिया गया था जिनको बाद में छोड़ दिया गया। यह कार्यवाही ड्यूटी मजिस्ट्रेट के मार्गदर्शन में कार्रवाई की गई थी |


