बी.पी.एस. महिला विश्वविद्यालय में तीन दिन का संस्कृत समारोह हुआ संपन्न
विद्वता का मानदंड अंग्रेजी नहीं, संस्कृत भाषा हो : डॉ. कौशल
गोहाना :-14 अगस्त : बी.पी.एस. महिला विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ हायर लर्निंग तथा हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला के संयुक्त तत्वावधान में संस्कृत सप्ताह -2024 के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय संस्कृत समारोह संपन्न हो गया ।
समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के संस्कृत प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ सी.डी.एस. कौशल पहुंचे । अध्यक्षता डीन आर्ट एंड लैंग्वेजेज प्रो अशोक वर्मा ने की। मुख्य वक्ता कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो विभा अग्रवाल रही। इस अवसर पर ‘आधुनिक संस्कृत साहित्य में महिलाओं का योगदान’ विषय पर एक व्याख्यान भी आयोजित किया गया ।
डॉ सी.डी.एस. कौशल ने संस्कृत में बोलचाल को व्यक्तित्व विकास में सहायक बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृत का अध्ययन अनिवार्य होना चाहिए। डॉ कौशल ने कहा कि आजकल विद्वता का मानदंड अंग्रेजी भाषा
को बना दिया गया है, लेकिन भारतीय संदर्भ में यह मानदंड संस्कृत भाषा होनी चाहिए। उन्होंने उपस्थित छात्राओं को जीवन में कम से कम तीन भाषाएं सीखने के लिए प्रेरित किया ।
प्रो अशोक वर्मा ने कहा कि ज्ञान की प्राप्ति श्रद्धा के बगैर संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अपनी जिज्ञासा बनाए रखें और अपने अंदर के विद्यार्थी को मरने न दें। प्रो अशोक वर्मा ने साहित्य को भाषाओं के बंधन से परे बताया। उन्होंने छात्राओं का आह्वान किया कि वे आधुनिकता की चकाचौंध में अपनी जड़ों से न करें।
प्रो विभा अग्रवाल ने संस्कृत साहित्य के काल 5 विभाजन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्कृत साहित्य रचना में महिलाओं के योगदान को कम नहीं समझना चाहिए। उन्होंने ने संस्कृत साहित्य में सशक्त योगदान देने वाली महिला साहित्यकारों का उल्लेख भी किया।
इस तीन दिवसीय संस्कृत समारोह के प्रथम दिन पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता तथा दूसरे दिन श्लोकोच्चारण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया पोस्टर मेकिंग में सुशिता ने प्रथम, सुमन ने दूसरा व रोमी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया तथा महक व सपना को सांत्वना पुरस्कार मिला। वहीं, श्लोकोच्चारण प्रतियोगिता में अनु ने प्रथम, नेहा ने दूसरा व पावनी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया तथा सोनिया व विनीता को सांत्वना पुरस्कार मिला ।


