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जैन संत आदीश मुनि ने अपने प्रवचन में कहा कि-घर और मन की शांति के लिए अधिकारों का त्याग करना आवश्यक है

गोहाना :-13 अगस्त : अगर आप हक के लिए लड़ते ही रहोगे, न केवल आप का मन अपितु आप का परिवार भी अशांत बने रहेंगे। यह चेतावनी मंगलवार को जैन संत आदीश मुनि ने दी। वह चातुर्मास के लिए पुरानी अनाज मंडी के जैन स्थानक में प्रवास कर रहे हैं। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि घर और मन की शांति के लिए अधिकारों का त्याग करना आवश्यक है।

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रामायण और महाभारत की तुलना करते हुए आदीश मुनि ने कहा कि कौरव पांडवों से अपने अधिकार के साथ उनका अधिकार भी छीन लेना चाहते थे । उसी जिद्द में उनके वंश का ही सर्वनाश हो गया। लेकिन भगवान राम ने अपने अधिकार का त्याग कर समस्त विश्व के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत कर दिया।

जैन संत आदीश मुनि ने कहा कि अगर दो भाइयों में बंटवारा हो रहा हो तो कोई चीज छोड़नी पड़े तो उसे आराम से छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां त्याग की भावना होगा, वहां कोई विवाद नहीं होगा। लेकिन अगर भावना छीनने पर उतारू होने की होगी, वहां रिश्ते तार-तार हो जाएंगे।

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