मंगल पांडेय की 97वीं जयंती पर गोहाना के भगवान परशुराम आश्रम में आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे द्वारा आयोजित कार्यक्रम में गोहाना वासियों ने पुष्पांजलि से किया नमन
चर्बी वाले कारतूस मुंह से खोलने से मना कर दिया था पांडेय ने : जगबीर मलिक

गोहाना:-19 जुलाई : मंगल पांडेय ने गाय और सूअर की चर्बी वाले कारतूस मुंह से खोलने से मना कर दिया था। शुक्रवार को यह खुलासा उनकी 97वीं जयंती पर गोहाना हलके के कांग्रेस विधायक जगबीर सिंह मलिक ने किया ।
मलिक शहर के सेक्टर 7 स्थित भगवान परशुराम आश्रम में आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य संबोधन कर रहे थे। अध्यक्षता मोर्चे के मुख्य संरक्षक आजाद सिंह दांगी ने की ।
मुख्य वक्ता जगबीर सिंह मलिक ने कहा कि 1857 के पहले गदर में मंगल पांडेय की अहम भूमिका थी। उन्होंने अपनी ही बटालियन के
खिलाफ बगावत कर दी थी। उन्होंने 29 मार्च 1857 को कोलकाता में दो ब्रिटिश अफसरों को गोली मार कर मौत की नींद में सुला दिया था। इस पर उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई ।
आजाद सिंह दांगी ने बताया कि मंगल पांडेय का जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के नगवा गांव में हुआ था। वह ईस्ट इंडिया कम्पनी की 34वीं बंगाल इन्फेंट्री के सिपाही थी ।
जयंती कार्यक्रम में प्रभुदयाल, सुभाष वर्मा, सतबीर पौडिया, राजपाल कश्यप, धर्मपाल लठवाल, राम मेहर पांचाल, बंसी वाल्मीकि, धर्मबीर मलिक, राज कुमार नरवाल, शेरदीन फौजी, राम कुमार बैरागी और धर्मबीर भावड़ भी मौजूद रहे।


