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गोहाना हलके के कांग्रेस विधायक का दावा : जिला बनाने से विधानसभा में सरकार कर चुकी है इंकार

सी.एम. को आने से पहले तसल्ली कर लेनी चाहिए थी कि बाईपास बन भी सकता है या नहीं : मलिक

गोहाना :-23 जून : शनिवार के प्रदेश स्तर के संत कबीर जयंती समारोह में सी.एम. नायब सिंह सैनी द्वारा गोहाना के लिए की गई दोनों घोषणाओं के लिए रविवार को गोहाना हलके के कांग्रेस विधायक जगबीर सिंह मलिक ने उन्हें घेरा। उन्होंने सैनी को नसीहत दी कि उन्हें गोहाना आने से पहले तसल्ली कर लेनी चाहिए थी कि बाईपास बन भी सकता है या नहीं। उन्होंने सी. एम. को यह भी याद दिलाया कि उन्हीं की पार्टी की सरकार विधानसभा में गोहाना को जिला बनाने से इंकार कर चुकी है।

जगबीर सिंह मलिक शहर में पुराने बस स्टैंड पर स्थित अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने सी.एम. और उनकी पार्टी भाजपा को खुली चुनौती दी कि वह दस साल के कार्यकाल में एक भी ऐसा प्रोजेक्ट बता दें जिसका गोहाना शहर में शिलान्यास भी उन्हीं की सरकार ने किया हो और उद्घाटन भी ।

गोहाना हलके के कांग्रेस विधायक ने कहा कि बाईपास की लाइनिंग हुड्डा सरकार के कार्यकाल में हो चुकी थी। पहली बार सी.एम. बनने पर जब मनोहर लाल खट्टर गोहाना के आर.ओ. बी. का उद्घाटन करने आए थे, तब उन्होंने बाईपास मंजूर किया था। लेकिन प्रथम कार्यकाल के पी.डब्ल्यू.डी. मंत्री राव नरवीर सिंह ने विधानसभा में दो टूक कहा कि लागत ज्यादा होने और दो-दो फ्लाई ओवर की आवश्यकता होने के चलते गोहाना का बाईपास नहीं बनाया जा सकता । बाद में यह साफ हो गया कि लागत अधिक होने के चलते बाईपास का प्रस्ताव कैंसिल कर दिया गया है।

जगबीर सिंह मलिक ने नायब सिंह सैनी को इस पेशकश के लिए घेरा कि जमीन मिलते ही बाईपास बना दिया जाएगा। उन्होंने सवाल किया कि मुफ्त में जमीन भला कौन देगा। जब दूसरे कामों के लिए सरकार जमीन एक्वायर करती है तो बाईपास के लिए क्यों नहीं कर सकती। विधायक ने कहा कि कांग्रेस के सत्ता में लौटने पर उनकी सबसे पहली प्राथमिकता बाईपास बनवाने की होगी। वह विधानसभा में बाईपास के मुद्दे को बार-बार उठाते रहे हैं।

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जिले के मुद्दे पर जगबीर सिंह मलिक ने कहा कि सी.एम. की गोहाना को जिला बनाने की घोषणा चुनावी शगूफा भर है। भाजपा सरकार के पहले कार्यकाल में तब के राजस्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने विधानसभा में जवाब नो दे रखा है तो दूसरे कार्यकाल में मंत्री के रूप में दुष्यंत चौटाला स्पष्ट कर चुके हैं कि गोहाना को जिला बनाने का कोई प्रस्ताव ही नहीं है। जिस धनखड़ कमेटी के अनुमोदन पर चरखी दादरी को जिला बनाया गया था, उसी कमेटी ने वॉयबिलिटी के आधार पर गोहाना को जिला बनाने का प्रस्ताव रद्द कर दिया था। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि जिले की संभावना को हवा दे कर प्रॉपर्टी डीलर चांदी कूट.लेंगे और आम गरीब आदमी बुरी तरह लुट जाएगा।

गोहाना हलके के कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि हुड्डा सरकार ने गोहाना शहर में जिन तीन सेक्टरों के लिए मुआवजा 2013 में ही दे दिया था, उसकी ज्यादातर जमीन पर अधिकारियों की मिलीभगत से तभी से भूमि के मालिक खेतीबाड़ी करते आ रहे हैं। अधिकारी दिनदहाड़े झूठ बोलते हैं कि केवल 50 एकड़ को बोया जा रहा है और बाकी की जमीन खाली पड़ी है।विधायक ने चुनौती दी कि उनके पास वीडियो मौजूद हैं जिनसे साबित होता है कि अधिकांश भूमि पर खेती हो रही है।

जगबीर सिंह मलिक ने यह भी खुलासा किया कि शहर में ठसका रोड पर स्थित जिस संत कबीर आश्रम के लिए सी.एम. सैनी ने 31 लाख घोषित किए हैं, उसी आश्रम के लिए दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने 26 नवंबर 2018 को 21 लाख रुपए दिए थे। जून 2012 में सी.एम. के तौर पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 51 लाख रुपए और दिए। लेकिन जब वह राशि आश्रम की जमीन ठसका पंचायत की होने से उसे चले गए, तब भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आश्रम के लिए और 30 लाख रुपए जारी कर दिए थे।

 

Khabar Abtak

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