105 साल के मूर्धन्य साहित्यकार डॉ. रामकृष्ण अग्रवाल देहदान से सदा-सर्वदा के लिए अमर हो गए
गोहाना क्षेत्र के हैं छठे देहदाता, पहले के पांचों देहदाताओं में सबसे बड़ी उम्र के हैं दिवंगत चिकित्सक

गोहाना :-17 जून : अपने देहदान से 105 वर्ष के मूर्धन्य साहित्यकार और पूरी दस पुस्तकों के रचयिता डॉ. रामकृष्ण अग्रवाल सदा-सर्वदा के लिए अमर हो गए। उनका देहदान गांव खानपुर कलां में स्थित बी.पी.एस. राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज की एम.बी.बी.एस. की छात्राओं के लिए हुआ ।
डॉ. रामकृष्ण अग्रवाल का जन्म 1 मार्च 1919 को मेवात जिले के पुन्हाना क्षेत्र के गांव बिछौर में हुआ। दिल्ली के सीताराम बाजार स्थित निखिल भारतवर्षीय विद्यापीठ से उन्होंने आयुर्वेदिक चिकित्सक की डिग्री प्राप्त की। 1986 से वर्ष 2003 तक उन्होंने अग्रवाल सत्संग भवन के धर्मार्थ चिकित्सालय में भी अपनी सेवाएं प्रदान कीं ।
डॉ. रामकृष्ण अग्रवाल को पत्नी केला देवी का स्थायी बिछोह 16 जनवरी 1996 को सहन करना पड़ा। उनके चार बेटे-बहू कृष्ण कुमार और मीरा, मनोज कुमार और रचना, शशिकांत गोयल और संगीता गोयल, प्रमोद गोयल और पूनम गोयल, बेटी-दामाद उर्मिला पत्नी स्व. भगवान दास और श्याम लता और सुंदर मंगल हैं।
रविवार की रात को 10 बज कर 10 मिनट पर डॉ. रामकृष्ण अग्रवाल ने दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। 105 वर्ष 3 माह 15 दिन लंबा जीवन भोगने वाले डॉ. अग्रवाल ने काफी समय पहले इच्छा व्यक्त की दी थी कि उनका अंतिम संस्कार न कर उनकी देह किसी मेडिकल कॉलेज को दान कर दी जाए।
सोमवार को उनकी इस इच्छा को परिवार ने समग्र समाज के समक्ष श्मशान घाट में पूर्ण किया । श्मशान घाट से ही उनकी पार्थिव देह को बी.पी.एस. राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज के लिए एंबुलेंस में ले जाया गया। पूरी प्रक्रिया में रक्तदान – नेत्रदान- देहदान के लिए समर्पित संस्था आहुति की विशिष्ट भूमिका रही ।
विशेष उल्लेखनीय है कि जब पुरानी अनाज मंडी स्थित निवास से डॉ. रामकृष्ण अग्रवाल की देह शवयात्रा में श्मशान घाट मे. पहुंची, बाकायदा चिता सजी । उस चिता पर पार्थिव देह को रखा भी गया। लेकिन बाद में दाह संस्कार एक पुतले का हुआ जिसे स्व. वयोवृद्ध के पहने वस्त्र ही पहनाए गए।
डॉ. रामकृष्ण अग्रवाल गोहाना क्षेत्र के छठे देहदाता बने । उनसे पूर्व पांच अन्य नागरिकों के परिवार भी उनके देहदान करवा चुके हैं।
श्मशान घाट से पार्थिव देह को ले कर जब एंबुलेंस महिला मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना हुई, उस पल के साक्षी तीर्थ सिंह राणा, सुभाष भारद्वाज, परमानंद लोहिया, हरीश कर्नाटक, सत्य नारायण गोयल, संजय मेहंदीरत्ता, बलजीत दांगी, डॉ. संदीप सेतिया, सन्नी निरंकारी, राम निवास गोयल, वेद प्रकाश सैनी डॉ. मनोज शर्मा, अश्विनी कुमार,
विनोद जैन, शीशपाल गोयल, सत्य नारायण शर्मा, कृष्ण शर्मा, बलदीप शास्त्री, सूरत शर्मा, सुरेंद्र पांचाल, गुलशन बजाज, के.सी. शर्मा, जगवीर जैन, विजय मित्तल, सुरेंद्र गर्ग, रवींद्र गर्ग, हरि प्रकाश गुप्ता, सूरजभान बंसल, संत लाल रोहिल्ला, अरविंद जैन, सुमेर जैन, सुरेश वर्मा, राहुल गोयल, दीपक मखीजा आदि भी बने।
डॉ. रामकृष्ण अग्रवाल की पार्थिव देह को उनके सबसे छोटे बेटे प्रमोद गोयल, पोते दिव्यांशु गोयल के साथ आहुति के सुरेंद्र विश्वास और राकेश गंगाणा गांव खानपुर कलां स्थित बी.पी.एस. राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज में पहुंचे। वहां पार्थिव देह को एनाटॉमी डिपार्टमेंट की कार्यवाहक एच.ओ.डी. डॉ. भूमिका ने ग्रहण किया । डॉ. रामकृष्ण अग्रवाल छठे देहदाता बने। सर्वप्रथम देहदान 5 जुलाई 2019 को 87 वर्षीय भागवंती गंगनेजा, दूसरा देहदान 1 नवंबर 2021 को 90 साल की भलिया देवी, तीसरा देहदान 14 फरवरी 2022 को 82 वर्ष के तिलक राज नागपाल, चौथ देहदान 23 अप्रैल 2023 को 57 साल के चंद्र प्रकाश ग्रोवर और पांचवां देहदान 20 मई 2023 को 70 वर्ष की चांद कौर का हुआ। इस तरह छह देहदाताओं में 3 पुरुष और 3 ही महिलाएं हैं ।
अपने जीवनकाल में डॉ. रामकृष्ण अग्रवाल ने दस पुस्तकों की रचना की। ये पुस्तकें गीतिका रामायण, अध्यात्म विज्ञान और हम, जीवन निर्माण, हमारी-तुम्हारी बात श्रीराम के साथ, तंदुरुस्ती का खजाना, उड़ान गीत गवारे, बुर्के वाली और विश्व गीता हैं । इन सब पुस्तकों की टाइपिंग से सैटिंग, अपने करकमलों से की बिना किसी का आश्रय स्वीकार किए।
गोहाना क्षेत्र के हैं छठे देहदाता, पहले के पांचों देहदाताओं में सबसे बड़ी उम्र के हैं दिवंगत चिकित्सक



