आजाद हिंद देशभक्त मोर्चा द्वारा आयोजित तारक नाथ दास की 140वीं जयंती के कार्यक्रम में पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन
क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी तारकनाथ ने. : जय नारायण गुप्ता
गोहाना :-15 जून : पश्चिम बंगाल के 24 परगना में 15 जून 1884 को जन्मे तारक नाथ ने क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए अपनी पढ़ाई तक बीच में छोड़ दी थी। यह टिप्पणी श्री गोपाल कृष्ण गौशाला के संस्थापक और पूर्व अध्यक्ष जय नारायण गुप्ता ने की। उनके अनुसार तारकनाथ अरविंद घोष, सुरेंद्रनाथ बनर्जी और चित्तरंजन दास के घनिष्ठ सहयोगी थे ।
जय नारायण गुप्ता आजाद हिंद देशभक्त मोर्चा के तत्वावधान में तारक नाथ दास की 140वीं जयंती के कार्यक्रम में उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मोर्चे के मुख्य संरक्षक आजाद सिंह दांगी ने की। मार्गदर्शन मोर्चे के निदेशक डॉ सुरेश सेतिया ने किया।
आजाद सिंह दांगी ने कहा कि तारकनाथ आजादी के रंग में ऐसे रंगे कि अंग्रेज उनके पीछे हाथ धो कर पड़ गए । तब तारकनाथ साधु के वेश में तारक ब्रह्मचारी के नाम से जापान में चले गए। डॉ. सुरेश सेतिया ने कहा कि स्वाधीनता संग्राम की क्रांति की ज्वाला को तेज करने के लिए तारकनाथ यूरोप और एशिया में भी गए। 22 दिसंबर 1958 को उनका देहांत अमेरीका में हुआ ।
इस कार्यक्रम में सतबीर पौडिया, रमेश मेहता, राजपाल कश्यप, हरभगवान चोपड़ा, सुभाष शर्मा, अनुज कनौजिया, उधम सिंह, बलवान सिंह आदि ने भी पुष्पांजलि भेंट की।


