गोहाना के सेक्टर 7 स्थित महर्षि दयानंद सरस्वती पार्क में राम प्रसाद बिस्मिल की 127वीं जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन
हिंदू-मुस्लिम एकता थी बिस्मिल की आखिरी इच्छा : डॉ. सैनी
गोहाना :-11 जून : फांसी चढ़ाए जाने से पहले राम प्रसाद बिस्मिल ने कहा था कि अगर देश को हमारी कुर्बानी का रत्तीभर भी दुख है, हर कीमत पर हिंदू और मुस्लिम एकता को बनाए रखें, यह हमारी आखिरी इच्छा है।
मंगलवार को यह खुलासा योगाचार्य डॉ. सुरेश सैनी ने किया। वह सेक्टर 7 में स्थित महर्षि दयानंद सरस्वती पार्क में राम प्रसाद बिस्मिल की 127वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे के तत्वावधान में हुआ। अध्यक्षता मोर्चे के मुख्य संरक्षक आजाद सिंह दांगी ने की।
डॉ. सुरेश सैनी ने कहा कि राम प्रसाद बिस्मिल ने राजेंद्र लाहिड़ी और अशफाक उल्ला खां के साथ मिल कर काकोरी कांड को अंजाम दिया था ।
18 महीने की सुनवाई के बाद ब्रिटिश सरकार ने 19 दिसंबर 1927 को तीनों क्रांतिकारियों को अलग-अलग शहरों की जेलों में शूली पर टांग दिया था। आजाद सिंह दांगी ने कहा कि राम प्रसाद बिस्मिल ने अपने साथियों के साथ मिल कर हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन का गठन किया था। वह देश की आजादी को भीख के रूप में या अंग्रेजों से बातचीत कर हासिल नहीं करना चाहते थे ।
वह आर्य समाज से प्रेरित थे। कार्यक्रम में सुरेश पवार, जोगेंद्र मक्कड़, महावीर शर्मा, रमेश वर्मा, ज्योति मक्कड़, सुनीता सैनी, पूनम मदान, रोशनी, निर्मला, सोनिया, रामरति आदि भी मौजूद रहे ।


