हार की बौखलाहट में दोषारोपण कर रहे हैं पूर्व मुख़्यमंत्री खट्टर : यादव
गोहाना :-1 जून : पूर्व सी. एम. मनोहर लाल खट्टर हार की बौखलाहट में अधिकारियों और कर्मचारियों पर दोषारोपण कर रहे हैं। शनिवार को यह टिप्पणी सर्व कर्मचारी संघ की गोहाना इकाई के सचिव सुरेश यादव ने की।
सुरेश यादव, जो ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशन वर्कर यूनियन के राज्य नेता भी हैं, पूर्व सी.एम. की कर्मचारियों को देख लेने की धमकी पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चुनाव कोई भी रहे, उस समय सरकार किसी भी पार्टी की रही, कर्मचारियों ने हमेशा पूरी ईमानदारी से अपनी चुनाव ड्यूटी दी। इस बार भी किसी भी बूथ से एक भी शिकायत नहीं आई। कर्मचारियों ने चुनाव ड्यूटी पूरी शिद्दत से दी तथा आगे भी देंगे।
सर्व कर्मचारी संघ की गोहाना इकाई के सचिव ने कहा कि मनोहर लाल खट्टर द्वारा अधिकारियों और कर्मचारियों पर मिथ्या दोषारोपण और उन्हें देख गोहाना मुद्रिका, 1 जून : पूर्व सी. एम. मनोहर लाल खट्टर हार की बौखलाहट में अधिकारियों और कर्मचारियों पर दोषारोपण कर रहे हैं। शनिवार को यह टिप्पणी सर्व कर्मचारी संघ की गोहाना इकाई के सचिव सुरेश यादव ने की। सुरेश यादव, जो ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशन वर्कर यूनियन के राज्य नेता भी हैं, पूर्व सी.एम. की
कर्मचारियों को देख लेने की धमकी पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चुनाव कोई भी रहे, उस समय सरकार किसी भी पार्टी की रही, कर्मचारियों ने हमेशा पूरी ईमानदारी से अपनी चुनाव ड्यूटी दी। इस बार भी किसी भी बूथ से एक भी शिकायत नहीं आई। कर्मचारियों ने चुनाव ड्यूटी पूरी शिद्दत से दी तथा आगे भी देंगे।
सर्व कर्मचारी संघ की गोहाना इकाई के सचिव ने कहा कि मनोहर लाल खट्टर द्वारा अधिकारियों और कर्मचारियों पर मिथ्या दोषारोपण और उन्हें देख लेने की धमकी देना अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है। जो नेता लगातार 9.6 साल दो टर्म तक प्रदेश का मुखिया रह चुका हो, उसे ऐसी भाषा कदाचित शोभा नहीं देती । सुरेश यादव ने कहा कि अगर अपने शासनकाल में मनोहर लाल खट्टर ने जनता का दमन करने की जगह उसकी आवाज सुनी होती, जनता की समस्याओं को समझा और दूर किया होता, तब उनको बिन मांगे वोट मिलते। जनता को नाराज कर खट्टर उस से वोट की सौगात की उम्मीद कर भी सकते हैं तो कैसे ? सर्व कर्मचारी संघ के नेता ने कहा कि पूर्व सी.एम. को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। किसान हों या मजदूर, आशा वर्कर हों या आंगनबाड़ी वर्कर अथवा सरपंच, उनकी सरकार ने सब वर्गों पर लाठियां भांजीं तथा उनके दमन का प्रयास किया जिसका खामियाजा उन्हें चुकाना ही पड़ेगा ।



