आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे ने गोहाना में जलियांवाला बाग नरसंहार के शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए कार्यक्रम किया आयोजित
जलियांवाला बाग की दीवारों पर अब भी मौजूद हैं नरसंहार के निशान : गुप्ता
गोहाना :-13 अप्रैल : बेशक 104 साल गुजर चुके हैं, लेकिन अमृतसर के जलियांवाला बाग की दीवारों पर 13 अप्रैल 1919 के नरसंहार की गोलियों के निशान अब भी मौजूद हैं। शनिवार को यह टिप्पणी गोहाना शहर की दोनों गौशालाओं के पूर्व अध्यक्ष जय नारायण गुप्ता ने की। नरसंहार के शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए जन कार्यक्रम आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे ने आयोजित किया ।
यह कार्यक्रम पुराने बस स्टैंड पर स्थित शहीद स्मारक पर हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता मोर्चे के निदेशक डॉ. सुरेश सेतिया ने की। संयोजन मोर्चे के मुख्य संरक्षक आजाद सिंह दांगी ने किया।
मुख्य वक्ता जय नारायण गुप्ता ने कहा कि जलियांवाला बाग नरसंहार स्वाधीनता आंदोलन कर एक अहम कड़ी था। इसी नरसंहार ने ब्रिटिश सरकार की चूलें हिला दी थीं तथा बाद में मां भारती के सपूत वीर उधम सिंह ने इस नरसंहार के खलनायक जनरल डायर को उसी की जमीन पर मौत की नींद में हमेशा के लिए सुला दिया था।
श्रद्धांजलि समारोह के अध्यक्ष डॉ. सुरेश सेतिया ने कहा कि जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों के नाम बेशक कोई नहीं जानता, लेकिन वे आजादी की लड़ाई के वे शिला स्तंभ हैं जो बाहर से बेशक दिखाई नहीं देते, लेकिन अपने मकसद को भरपूर मजबूत कर देते हैं ।


