गोहाना के सिविल अस्पताल से मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के अभाव में नहीं होना होगा हायर सेंटर के लिए रेफर
विशेषज्ञों की नियुक्ति कराई जाएगी

गोहाना :-शहर के सिविल अस्पताल से मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के अभाव में हायर सेंटर के लिए रेफर नहीं होना पड़ेगा। अब उन्हें अस्पताल परिसर में ही जल्द गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा मिलेगी। इसके लिए चिकित्सा अधिकारी जल्द ही अस्पताल में तैयार गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) एवं उच्च निर्भरता इकाई (एचडीयू) को चालू करेंगे। चिकित्सा अधिकारियों का दावा है कि आचार संहिता हटने के बाद अस्पताल परिसर में विशेषज्ञों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी। इसका सीधा लाभ उपमंडल के लोगों को मिलेगा।
शहर में बरोदा रोड स्थित 50 बेड के सिविल अस्पताल में फिलहाल जनरल मेडिसिन, हड्डी रोग, आंख रोग, दांतों, बच्चों की ओपीडी के अलावा आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं संचालित हैं। इसके विपरीत आईसीयू-एचडीयू की सुविधा संचालित नहीं है। ऐसे में चिकित्सकों को आपात स्थिति या गंभीर मरीजों को हायर सेंटर के लिए रेफर करना पड़ता है। इससे न केवल मरीजों, बल्कि उनके परिजनों को परेशानी उठानी पड़ती है। क्योंकि उन्हें इलाज के लिए दूर-दराज क्षेत्र में स्थित राजकीय अस्पतालों में जाना पड़ता है। इसी के मद्देनजर चिकित्सा अधिकारियों ने सिविल अस्पताल में आईसीय-एचडीयू चालू करने का निर्णय लिया है। हालांकि अस्पताल की दूसरी मंजिल पर आईसीय-एचडीयू तैयार हो चुका है, लेकिन अभी तक उसमें विशेषज्ञों की नियुक्ति नहीं हुई है।
ऐसे में अब चिकित्सा अधिकारियों ने लोकसभा चुनाव के चलते लगी आचार संहिता हटने के बाद विशेषज्ञों की नियुक्ति कराने का निर्णय लिया है। इसके बाद आईसीयू-एचडीयू चालू होने से मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
^गोहाना के सिविल अस्पताल में आईसीयू-एचडीयू तैयार कराया जा चुका है। अब उसमें विशेषज्ञों की नियुक्ति की जानी है। यह प्रक्रिया आचार संहिता हटने के बाद पूरी करके आईसीयू-एचडीयू को चालू कराया जाएगा, ताकि मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिल सके। डॉ. जयकिशोर, सीएमओ, सोनीपत।
सिविल अस्पताल परिसर में जो आईसीयू-एचडीयू तैयार किया गया है, वह छह बेड का होगा। इसमें मरीजों को ऑक्सीजन समेत अन्य चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी। इसी के तहत चिकित्सा अधिकारियों द्वारा विभिन्न बीमारियों के विशेषज्ञों की नियुक्ति कराई जाएगी। इसके बाद मरीजों को इलाज के अभाव में हायर सेंटर के लिए रेफर नहीं होना पड़ेगा। इससे उनके परिजनों को भी काफी राहत मिलेगी।


