गोहाना में आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे ने गणेश शंकर विद्यार्थी की पुण्यतिथि पर श्रद्धा सुमन किए अर्पित
दंगाग्रस्त इलाकों में जानें बचाते हुए जान पर खेल गए विद्यार्थी : डॉ. सेतिया
गोहाना :-26 मार्च: जब ब्रिटिश शासन शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को सूली पर टांगा, उसके बाद भड़के दंगों में बेगुनाहों की जानें बचाते हुए गणेश शंकर विद्यार्थी अपनी ही जान पर खेल गए। उनके अनुसार विद्यार्थी ने कानपुर के बंगाली मोहल्ले से दो सौ से अधिक मुस्लिम परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला ।
मंगलवार को यह टिप्पणी आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे के निदेशक डॉ. सुरेश सेतिया ने की। वह कलम के मसीहा और जाने-माने स्वाधीनता सेनानी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे थे । पुराने बस स्टैंड पर स्थित शहीद स्मारक पर हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता
मोर्चे के मुख्य संरक्षक आजाद सिंह दांगी ने की।
आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे के निदेशक ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी ने अपनी पूरी जिंदगी किसानों और मजदूरों के लिए संघर्ष करने में लगा दी। वह गोरों के शासन की पत्रकारिता के एक ऐसे हस्ताक्षर थे कि अंग्रेजों भी उनसे डरते थे। आजाद सिंह दांगी ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी आजादी के लिए पूरे पांच बार जेल में गए।
इस अवसर पर सतबीर पौडिया, सतबीर रहबारी, सुभाष शर्मा, कृष्ण कश्यप, सोनू रहबारी, राजेश बाजवान, धर्मपाल नरवाल आदि भी उपस्थित रहे ।


