तय समय से 11 घंटे पहले फांसी पर चढ़ा दिए गए शहीद : कौंडिल
गोहाना :-23 मार्च : फांसी 24 मार्च 1931 को दी जानी मुकर्रर थी, पर 11 घंटे पहले ही 23 मार्च 1931 को 7:30 बजे दे दी गई। शनिवार को यह खुलासा प्रांत सेवा क्षेत्र के शिक्षा सह संयोजक रोशन लाल कौंडिल ने किया। कौंडिल शहर में गुढ़ा रोड पर स्थित गीता विद्या मंदिर में कर रहे थे। अध्यक्षता स्कूल के प्रिंसिपल अश्विनी कुमार ने की। रोशन लाल कौडिल ने कहा कि भगत सिंह के पिता किशन सिंह, चाचा अजीत सिंह और स्वर्ण सिंह भी स्वाधीनता सेनानी थे। 1919 में जब महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन प्रारंभ हुआ, उस समय भगत सिंह कक्षा 7 के स्टूडेंट थे। 15 साल की उम्र से वह क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लेने लगे थे । संयोजन विवेकानंद सदन ने किया। शिक्षिका संतोष भारद्वाज और पूनम पन्नू ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के जीवन पर प्रकाश डाला। संगीत शिक्षिका मुनेश ने ए मेरे वतन के लोगो गीत की प्रस्तुति से माहौल को देशभक्तिपूर्ण बना दिया ।


