गोहाना में स्व. गुरुदत्त विद्यार्थी की 134वीं पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन
गुरुदत्त विद्यार्थी थे डी.ए.वी. स्कूल के संस्थापक : आर्य
गोहाना :-19 मार्च : यह गुरुदत्त विद्यार्थी ही थे जिन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती के निधन के बाद दयानंद एंग्लो वैदिक (डी.ए.वी.) स्कूल की स्थापना की थी तथा ऐसा सबसे पहला स्कूल 1 जून 1886 को पाकिस्तान के लाहौर में प्रारंभ किया था ।
मंगलवार को यह खुलासा आर्य समाज की बरोदा रोड इकाई के अध्यक्ष प्रेम लाल आर्य ने किया।वह स्व. गुरुदत्त विद्यार्थी की 134वीं पुण्यतिथि पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर रहे थे। अध्यक्षता आजाद हिंद
देशभक्त मोर्चे के मुख्य संरक्षक आजाद सिंह दांगी ने की। मुख्य अतिथि समाजसेवी पालेराम लठवाल रहे।
मुख्य वक्ता प्रेम लाल आर्य ने कहा कि गुरुदत्त विद्यार्थी आर्य समाज के पांच प्रमुख नेताओं में से एक थे। वह महर्षि दयानंद सरस्वती के अनन्य शिष्य थे। वह अत्यत्न मेधावी और वैरागी प्रकृति के थे। उनका जीवन बहुआयामी था। केवल 26 वर्ष की आयु में उनका निधन टी.बी. के रोग के चलते 19 मार्च 1890 को हो गया।
आजाद सिंह दांगी ने कहा कि गुरुदत्त विद्यार्थी ने अपना पूरा जीवन वैदिक धर्म के प्रचार और प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। वह अविद्या की समाप्ति और विद्या के विस्तार से देश की जनता को अंधकार से प्रकाश में ले जाना चाहते थे। उन्होंने तब के समान को अनेक कुरीतियों से भी मुक्ति दिलवाई।
इस अवसर पर सतबीर पौडिया, सतबीर भनवाला, बलवान सिंह लठवाल, जयपाल माथुर, धीरज चांदीवाल, रितिक दांगी, शेर दीन फौजी आदि भी उपस्थित रहे।


