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गोहाना के सिविल अस्पताल में मरीजों को चिकित्सा सुविधाओं के आभाव से पड़ रहा है जूझना, ना तो अल्ट्रासाउंड हो रहे और न ही आपातकाल में ब्लड की सुविधा मिल रही मरीजों को

गोहाना :-10 मार्च : गोहाना शहर के सिविल अस्पताल में मरीजों को चिकित्सा सुविधाओं की कमी से जूझना पड़ रहा है। हालात यह है कि अस्पताल में न तो मरीजों के अल्ट्रासाउंड हो रहे हैं और न ही आपातकाल में ब्लड की सुविधा मिल पा रही है। इसके लिए मरीजों को जहां दूर-दराज के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, वहीं निजी केंद्रों पर भी रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने सुविधाएं बढ़ाने के लिए मुख्यालय को प्रपोजल भेजे हैं, लेकिन लंबे समय से उन पर मंजूरी नहीं मिल रही है। इस कारण मरीजों को सुविधाओं के अभाव में परेशानी उठानी पड़ रही है। शहर के 50 बेड के अस्पताल में हर रोज 400 से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। यहां विभाग व स्थानीय प्रशासन द्वारा मरीजों को ओपीडी से लेकर आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लंबे समय से दावे किए जाते हैं। इसके बावजूद मरीजों को यहां बीते करीब 2 साल से न तो अल्ट्रासाउंड और न ही ब्लड स्टोरेज यूनिट की सुविधा मिल रही है।

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इस कारण हर रोज 50 से अधिक मरीजों को बिना अल्ट्रासाउंड कराए वापस लौटना पड़ रहा है। वहीं चिकित्सकों को खून के अभाव में आपातकाल में मरीजों को हायर सेंटर के लिए रेफर करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि अल्ट्रासाउंड के लिए अस्पताल प्रशासन को रेडियोलॉजिस्ट नहीं मिल रहा है। वहीं ब्लड स्टोरेज यूनिट खोलने की मुख्यालय से मंजूरी नहीं मिली है, जबकि यहां बीते करीब एक साल से फ्रिजर लैब में रखा हुआ है। इसके चलते मरीजों को चिकित्सा सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है। गोहाना. सिविल अस्पताल में बंद पड़ा अल्ट्रासाउंड केंद्र। सिविल अस्पताल में बीते दिनों विभाग की तरफ से गायनोकॉलोजिस्ट की नियुक्ति की गई थी। इस पर चिकित्सा अधिकारी ओपीडी के साथ जरूरत अनुसार नलबंदी के ऑपरेशन भी कर रहे थे। अब गायनोकॉलोजिस्ट डॉ. निशा पहाड़िया छह महीने के लिए डेपुटेशन पर रोहतक चली गई हैं। ऐसे में चिकित्सा अधिकारियों ने केवल सोमवार को ही महिलाओं की नलबंदी के ऑपरेशन करने का निर्णय लिया है, जिसके लिए सोनीपत से सर्जन को बुलाया जा रहा है। वहीं ओपीडी में एमबीबीएस की ड्यूटी लगाई है।

^अस्पताल में अल्ट्रासाउंड चालू करने के लिए रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। इसके लिए मुख्यालय से मंजूरी मांगी गई है। फिजियोथेरेपिस्ट के न आने की सूचना मुख्यालय को दे दी है। वहीं आईसीयू के लिए भी मुख्यालय से विशेषज्ञों की नियुक्ति की जानी है। मुख्यालय से मंजूरी के बाद ही अस्पताल में अतिरिक्त चिकित्सा सुविधाएं शुरू की जाएंगी, ताकि आमजन को उनका लाभ मिल सके।

– डॉ. संजय छिक्कारा, एसएमओ, सिविल अस्पताल, गोहाना।

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