बरोदा कॉलेज ; यू जी के लिए ही कमरे नहीं, पी जी कोर्स किया वापिस
उच्चतर शिक्षा विभाग ने बरोदा गांव में संचालित राजकीय कॉलेज को बिना मांगे ही राजनीतिक विज्ञान में एमए का कोर्स दिया था, लेकिन कॉलेज में पूर्व में चल रह कोर्स के लिए ही पर्याप्त बिल्डिंग नहीं है। इसलिए कॉलेज प्रशासन ने कोर्स को हैंडओवर करने के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग को पत्र लिखा
उच्चतर शिक्षा विभाग ने बरोदा गांव में संचालित राजकीय कॉलेज को बिना मांगे ही राजनीतिक विज्ञान में एमए का कोर्स दिया था, लेकिन कॉलेज में पूर्व में चल रह कोर्स के लिए ही पर्याप्त बिल्डिंग नहीं है। इसलिए कॉलेज प्रशासन ने कोर्स को हैंडओवर करने के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग को पत्र लिखा है। कॉलेज में यूजी कोर्स की कक्षाओं के लिए जो कमरे हैं, वे भी जर्जर हालत में हैं।
डीएचई ने नए शैक्षणिक सत्र के लिए उपमंडल के दो राजकीय कॉलेजों में नए कोर्स की मंजूरी दी है। इनमें बड़ौता गांव के राजकीय कॉलेज में बीसीए और बरोदा के कॉलेज में पीजी कोर्स एमए राजनीतिक विज्ञान की मंजूरी दी गई है, जबकि कॉलेज प्रशासन ने विभाग से केवल यूजी कोर्स और विषय शुरू करने की मंजूरी मांगी थी। बरोदा के राजकीय कॉलेज में बिना मांगे दिए गए पीजी कोर्स राजीनीतिक विज्ञान की 20 सीटें स्वीकृत की गई हैं, जबकि कॉलेज का अपना भवन नहीं है।
बड़ौता गांव स्थित राजकीय कॉलेज ने नए सत्र के लिए यूजी और पीजी कोर्स की डिमांड भेजी थी। नए सत्र के लिए कॉलेज को केवल एक यूजी कोर्स ही मिला है। वहीं बरोदा के कॉलेज प्रशासन द्वारा पीजी कोर्स हैंडओवर करने के चलते अब बड़ौता कॉलेज प्रशासन ने पीजी कोर्स उनके कॉलेज को देने की मांग को लेकर उच्चतर शिक्षा विभाग को पत्र लिखा है।
बरोदा कॉलेज में कक्षाएं लगाने के लिए यह है व्यवस्था: बरोदा का राजकीय कॉलेज को सरकारी स्कूल के भवन में चार कमरे उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें से एक कमरे में कार्यालय और तीन कमरों में बीए संकाय की कक्षाएं लगती हैं। कक्षाओं के लिए जो कमरे दिए गए हैं, उनकी हालत भी सही नहीं है। भवन काफी पुराना है, जिसके चलते कई वर्षों से स्कूल प्रशासन भी इन कमरों का प्रयोग कक्षाएं लगाने के लिए नहीं कर रहा था।
^उच्चतर शिक्षा विभाग ने कॉलेज में पीजी कोर्स एमए राजनीतिक विज्ञान की मंजूरी दी थी। कोर्स के लिए कॉलेज में पर्याप्त कमरे नहीं हैं। कक्षाएं लगाने को लेकर व्यवस्था नहीं होने पर कोर्स हैंडओवर करने के लिए विभाग को पत्र लिखा है।
पवन लठवाल, उप-प्राचार्य, राजकीय कॉलेज, बरोदा।



