“भारत में नेतृत्व का बदलता स्वरूप” विषय पर महिला विश्वविद्यालय में दो दिन की राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
तेजी से बदलते सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों में नेतृत्व प्रशिक्षण की आवश्यकता : प्रो. सुदेश
गोहाना :-5 मार्च : महिलाओं को राजनीतिक नेतृत्व में आगे आना चाहिए। भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां राजनीतिक नेतृत्व में महिलाओं को जोड़ने के लिए सतत
प्रयास किए जा रहे हैं। इस दिशा में महिला आरक्षण बिल एक बड़ा कदम है। यह उद्गार मंगलवार को बी.पी.एस. महिला विश्वविद्यालय की वी.सी. प्रो सुदेश ने इंस्टीट्यूट आफ हायर लर्निंग के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में अध्यक्षीय संबोधन में व्यक्त किए।
इस दो दिवसीय संगोष्ठी का विषय “भारत में नेतृत्व का बदलता स्वरूप” है। वी.सी. प्रो सुदेश ने कहा कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में महारत हासिल करने के लिए हमारे पास शिक्षण संस्थान और संबंद्ध पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। लेकिन राजनीतिक नेतृत्व के लिए कोई प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। उन्होंने तेजी से बदलते सामाजिक राजनीतिक समीकरणों में नेतृत्व प्रशिक्षण की जरूरत पर बल दिया और कहा कि भविष्य के नेताओं के लिए उचित प्रशिक्षण आवश्यक है। उन्होंने राजनीतिक नेतृत्व प्रदान करने के लिए विशेष कोर्स प्रारंभ किए जाने को वर्तमान समय की जरूरत बताया।
प्रो सुदेश ने कहा कि पहले यह धारणा बनी हुई थी कि राजनीति अच्छे लोगों के लिए नहीं है, लेकिन अब शिक्षित युवाओं का इस क्षेत्र में आना एक अच्छी पहल है। उन्होंने आई.एस.डी. (इंडियन स्कूल ऑफडेमोक्रेसी) सहित कुछ अन्य संस्थानों का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीतिक नेतृत्व के लिए इन संस्थानों द्वारा कैपेसिटी बिल्डिंग सहित अन्य आवश्यक बातें सिखाई जा रही हैं। वी.सी. ने राजनीतिक नेतृत्व पर मौलिक चिंतन करने की जरूरत उभारी और कहा कि हम जो भी करें, उसे पूरी विश्वसनीयता के साथ करें।
आई.सी.एस.एस.आर., नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में इंदिरा गांधी नेशनल कॉलेज, लाडवा के प्रिंसिपल डॉ कुशल पाल ने बतौर मुख्य वक्ता शिरकत की। डॉ कुशल पॉल ने चिंतन से पहले नेता के गुणों व विशेषताओं के बारे में जानने को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि त्वरित निर्णय क्षमता, संवाद कौशल, सक्षम, निपुणता आदि गुण राजनीतिक नेतृत्व के लिए जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी गुण जन्मजात नहीं होता, बल्कि इंसान मेहनत से खुद में नेतृत्व क्षमता पैदा कर सकता है। उन्होंने नेतृत्व की भूमिका को देश की दशा-दिशा निर्धारित करने में अहम बताया। दुनिया भर में नेतृत्व के अभाव पर बात करते हुए डॉ कुशल पॉल ने कहा कि भारत बाकी दुनिया से अलग है और हमारे देश में नेतृत्व के लिए संवैधानिक प्रतिमान उपलब्ध है।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़ के राजनीतिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ रमेश कुमार रहे। उन्होंने भारतीय राजनीति में
विश्वसनीयता का संकट विषय पर अपने विचार साझा किए। उद्घाटन सत्र का संचालन डीन, फैकल्टी आफ सोशल साइंस प्रो रवि भूषण ने किया।
वी. सी. प्रो सुदेश ने संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन भी किया। उद्घाटन सत्र का समापन राष्ट्रीय गान के साथ हुआ। वी.सी. प्रो सुदेश ने उपस्थित जन को जिम्मेदारी से मतदान करने की शपथ भी दिलाई। संगोष्ठी के कन्वीनर एवं राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ रामपाल, संगोष्ठी निदेशक एवं आई. एच. एल. की प्रिंसिपल डॉ. वीणा, आयोजन सचिव डॉ सुमन कुहाड़ आदि का विशेष सहयोग रहा।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में सात तकनीकी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें प. बंगाल, बिहार, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली सहित देश के 10 राज्यों के 15 विश्वविद्यालयों से लगभग 100 शिक्षक एवं शोधार्थी भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर डीन फैकल्टी ऑफ आर्ट एंड लैंग्वेजेज प्रो अशोक वर्मा. डीन छात्र कल्याण प्रो श्वेता हुड्डा, प्रो इप्शिता बंसल सहित विभिन्न विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।


