आहुति के 999वें नेत्रदाता बने हरिचंद डेंबला, नेत्रदान के बाद ही पार्थिव देह की हुई अंत्येष्टि
श्मशानघाट में नेत्रदान के लिए लेट किया दाह संस्कार
गोहाना :-25 फरवरी : डेंबला परिवार ने अपने मुखिया के पार्थिव देह की अन्त्येष्टि एक घंटा लेट कर दी, वह भी श्मशानघाट में नेत्रदान के पश्चात ही मुखाग्नि दी गई। नई दिल्ली के श्रॉफ आई बैंक के माध्यम से यह नेत्रदान रक्तदान – नेत्रदान- देहदान के लिए समर्पित संस्था आहुति ने करवाया। स्व. हरिचंद डेंबला 999 वें नेत्रदाता बने।
75 साल के हरिचंद डेंबला कुछ समय से अस्वस्थ थे। उन्होंने रविवार की सुबह 5:30 बजे अंतिम सांस ली। अंतिम संस्कार का समय दोपहर 12 बजे का था। आधा घंटा पहले डेंबला परिवार ने निश्चय किया कि बुजुर्ग के नेत्र अमर बनाए जाएंगे। इस के लिए आहुति के को-ओर्डिनेटर सन्नी निरंकारी से संपर्क हआ।
चूंकि समय कम था, परिवार ने आहुति के इस निवेदन को स्वीकार कर लिया कि श्रॉफ आई बैंक की टीम सीधे श्मशानघाट में पहुंचेंगी। शवयात्रा नीयत वक्त पर श्मशानघाट में पहुंच गई। टीम दोपहर एक बजे पहुंची।
नेत्र बैंक की टीम ने सार्वजनिक रूप से शोकसंतप्त परिजनों के सामने श्मशानघाट में ही नेत्रदान की प्रक्रिया पूर्ण की। नेत्रदान की पहल मृतक के बेटे-बहू संजय डेंबला और उषा डेंबला, बेटी-दामाद वीना अरोड़ो और विनोद अरोड़ा, निशा असीजा और नवीन असीजा ने की।
नेत्रदान स्वीकार के लिए पहुंची श्रॉफ आई बैंक की टीम डॉ. रमेश नारंग और हरीश जौहर पर आधारित थी । आहुति की टीम में सुरेंद्र विश्वास और मनोज दुरेजा थे।


