बंदूक के साथ कलम से भी सेवा की सूर्य कवि फौजी मेहर सिंह ने : कर्ण सिंह सांगी
गोहाना :-16 फरवरी : मेहर सिंह कलम और बंदूक के अद्वितीय संगम थे। उन्होंने जहां बंदूक उठा कर देश की सेवा की, वहीं कलम के सिपाही बन अपनी रागनियों से भी देशभक्ति की अलख जगाई। यह टिप्पणी शुक्रवार को स्वामी कर्ण सिंह सांगी ने की।
स्वामी कर्ण सिंह सांगी आजाद हिंद देशभक्त मोर्चे के कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। अध्यक्षता मोर्चे के मुख्य संरक्षक आजाद सिंह दांगी ने की । कर्ण सिंह सांगी ने कहा कि फौजी मेहर सिंह को सूर्य कवि का सम्मान प्राप्त है। उनका जन्म सोनीपत के बरोना गांव में 16 फरवरी 1918 को हुआ। 1941 में नेता जी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए। 1942 में रंगून की जेल में बंद हो गए। उसके बाद कई साल तक परिजनों को यह तक भनक नहीं लगी कि वह कहां हैं।
आजाद सिंह दांगी ने कहा कि सर्य कवि मेहर सिंह अपनी रागिनियों से आजाद हिंद फौज के सैनिकों का हमेशा मनोबल बढ़ाया। इस अवसर पर बलवान गुलिया, रोहतास अहलावत, सतबीर पौडिया, मदन अत्री, बलवान सिंह, लोकेश सहरावत आदि भी मौजूद रहे।


