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रिश्वत पर महंगाई की मार: पांच सौ-हजार के दिन गए… अब लाखों में डील, सीधे तय होता है दाम
केवल तहसील या पुलिस विभाग में ही नहीं बल्कि बिजली, पंचायती राज, पीडब्ल्यूडी खाद्य एवं आपूर्ति समेत अन्य विभागों के भी यही हालात हैं। छोटे-छोटे कामों के लिए मोटी रिश्वत वसूली जाती है। दो साल पहले के आंकड़ों का आकलन करें तो एसीबी छोटे स्तर के कर्मचारियों और अधिकारियों को ही निशाना बनाती थी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सख्त रवैये के चलते और एसीबी के मुखिया रहे शत्रुजीत कपूर ने पहली बार बड़े अधिकारियों पर शिकंजा कसा।

गोहाना :- देश में बढ़ रही महंगाई का असर अब रिश्वत की रकम में भी नजर आने लगा है। हरियाणा के सरकारी विभागों में अब रिश्वत मांगने के समय चाय-पानी की बात नहीं होती बल्कि सीधा रकम तय की जाती है। पिछले कुछ सालों में रिश्वत की राशि में कई गुणा वृद्धि हुई है।
राजस्व विभाग में पटवारी स्तर के कर्मी पहले 500 रुपये की रिश्वत के मामलों में पकड़े जाते थे लेकिन अब उन पर 5 से 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने के केस दर्ज हो रहे हैं। यही हाल, पुलिस विभाग में हवलदार (जांच अधिकारी) और थानेदार का है। केस निपटाने और धारा हटाने के मामलों में अब 5-10 हजार के बजाय 20 हजार से एक लाख रुपये तक लिए जा रहे हैं। हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो के आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं।



