माना जा रहा है कि इनसे साइबर क्राइम की वारदातों को अंजाम दिया जा रहा था, पुलिस इस एंगल पर भी लगातार पूछताछ कर रही है। आईबी की टीम ने भी इसी दिशा में आरोपियों से पूछताछ की है। इनके तार पड़ोसी प्रदेशों तक भी फैले हुए थे। कयास लगाए जा रहे है कि पानीपत में रिमांड खत्म होने के बाद दिल्ली, राजस्थान और चंडीगढ़ की टीम आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आ सकती है।
प्राथमिक जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और आयुष्मान कार्ड के अलावा बुढ़ापा पेंशन से लेकर विधवा पेंशन तक बनवाने का ठेका लेते थे। आरोपियों ने कम आयु वाले लोगों की भी पेंशन बनवाई हैं। पुलिस इस दिशा में भी पूछताछ कर रही है। इसके अलावा आरोपी फर्जी पासपोर्ट की संलिप्तता भी सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार आरोपी लोगों को कहते थे कि उन्हें डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए किसी भी शहर के चक्कर नहीं काटने होंगे, वह यहीं से उनका काम करा देंगे। सीआईए पासपोर्ट वाली दिशा में भी आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
आरोपियों के पास से पटवारी, नंबरदार व जिन पार्षदों की मुहर मिली है, सवाल ये है कि यह मुहर असली है और क्या इन अधिकारियों को उनकी मुहर के बारे में जानकारी थी या नहीं। आरोपियों ने यह मुहर कहां से मिली, कहां बनवाई या किसी ने इनको मुहैया कराई। आरोपियों के तार कहां-कहां जुडे हुए है, इन सब दिशा में पुलिस पूछताछ कर रही है।



