ऐसा वातावरण बने जिसमें रिसर्च के साथ मानव कल्याण का मार्ग भी दिखे: के के अग्रवाल
भारतीय शिक्षण मण्डल की कार्यशाला का आयोजन

नई दिल्ली, 01 नवंबर । भारतीय शिक्षण मण्डल की दिल्ली प्रान्त इकाई द्वारा ‘विकसित भारत @2047 के लिए भारतीय एवं पश्चिमी दृष्टि’ विषयक शोध प्रारूप की एक दिवसीय आनंदशाला (कार्यशाला) का सफल आयोजन गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय में किया गया | आनंदशाला में बतौर मुख्य अतिथि साउथ एशियन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो० के के अग्रवाल ने कहा कि भारतीय शोध दृष्टि के मूल में कल्याण की भावना निहित है जो शोध की पश्चिमी दृष्टि से भिन्न है | उन्होंने अच्छे शोध के लिए अच्छे प्रश्न पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें ऐसे वातावरण का निर्माण करना चाहिए जिसमें शोध शैक्षणिक उपलब्धि प्राप्त करने के साथ ही मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त हो | प्रो० अग्रवाल ने वर्तमान परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा में समयानुकूल परिवर्तन जरूरी है, शोध सिद्धांतों में समय सापेक्ष बदलाव के लिए नई शोध दृष्टि महत्वपूर्ण है | मुख्य वक्ता प्रो० नारायण प्रसाद ने भारतीय शोध के स्तर में गुणात्मक सुधार के लिए शैक्षणिक संस्थानों में अनुकूल बदलाव को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि हमें अपने शोध को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास करने होंगे | प्रांत अध्यक्ष प्रो० अजय कुमार सिंह ने कहा कि शोध एवं शिक्षा का मूल उद्देश्य आनंद की प्राप्ति ही है, हमारे प्राचीन ग्रंथ ऐसे शोध पद्धति को दर्शाते हैं | इस अवसर पर अखिल भारतीय महिला गतिविधि सह प्रमुख डॉ० विभूति गौड़ जी हरियाणा, पंजाब, एवं दिल्ली प्रांत के संगठन मंत्री गणपति तेति , प्रांत संगठन मंत्री सचिन मारन , प्रांत मंत्री डॉ० धर्मेन्द्र तिवारी, प्रांत उपाध्यक्ष विजयेता अग्रवाल सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे | आनंदशाला में कुल 60 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया |



