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कहानी कहने की कला से विद्यार्थियों ने सीखी रचनात्मक सोच व प्रभावी संवाद की तकनीकें

एसजीटीयू में ‘स्टोरीटेलिंग’ पर इंटरैक्टिव कार्यशाला आयोजित

 

गुरुग्राम, 2 सितंबर । एसजीटी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज, सोशल साइंसेज एंड लिबरल आर्ट्स (एसएचएसएल) की ओर से मानविकी, लिबरल आर्ट्स, मास कम्युनिकेशन, मनोविज्ञान और फोरेंसिक साइंसेज के विद्यार्थियों के लिए

एक इंटरैक्टिव कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इसका विषय था-

‘स्टोरीटेलिंग : ऑडियंस को जोड़ने और रचनात्मक सोच को बढ़ाने का एक माध्यम’।

कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को कहानी कहने की कला के माध्यम से प्रभावी संवाद, आत्म-अभिव्यक्ति, सहयोग, रचनात्मकता और दर्शकों से जुड़ने की क्षमताओं से परिचित कराना था।

कार्यशाला को बेहद सहभागितापूर्ण और व्यावहारिक रखा गया। विद्यार्थियों को कहानी कहने को केवल साहित्यिक अथवा मनोरंजन के माध्यम के बजाय प्रभावी संचार और रचनात्मक अभिव्यक्ति के एक सशक्त उपकरण के रूप में समझने का अवसर मिला। विभिन्न रोचक गतिविधियों और व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से विद्यार्थियों ने पात्र एवं कथानक विकसित करने, कहानी को प्रभावी ढंग से संरचित करने, आवाज और भाव-भंगिमाओं का इस्तेमाल करने तथा दर्शकों से बेहतर जुड़ाव स्थापित करने जैसी महत्वपूर्ण तकनीकें सीखीं।

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कार्यशाला का संचालन विश्वप्रसिद्ध कहानीकार, नेशनल आइकन अवार्ड विजेता एवं स्टोरीटेलिंग कोच सुश्री सीमा वाही मुखर्जी ने किया। उन्होंने अपनी संवादात्मक और अनुभवात्मक शैली से विद्यार्थियों को सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी कल्पनाओं के साथ प्रयोग करने, झिझक दूर करने और कहानी कहने को प्रभावी संचार एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा अपनी मौलिक कहानियों का सृजन और मंचन रहा। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से कार्य करते हुए रचनात्मक ढंग से सोचने और अपने विचारों को प्रभावशाली कथाओं में ढालने का अनुभव प्राप्त किया।

कार्यशाला विश्वविद्यालय की ओर से कक्षा-कक्ष की शिक्षा के साथ अनुभवात्मक और बहुविषयक सीखने के अवसर उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन के लिए आवश्यक व्यावहारिक एवं संचार कौशल विकसित करने में भी मदद करते हैं।

कार्यशाला का समन्वय डॉ. शम्मी नागपाल, डीन, एसएचएसएल और डॉ. श्वेता तिवारी, एसोसिएट डीन, एसएचएसएल ने किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न गतिविधियों एवं कहानी प्रस्तुतियों में सक्रिय सहभागिता निभाई।

Khabar Abtak

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