पत्रकार सुरक्षा को लेकर PCI का बड़ा कदम, केंद्रीय कानून की सिफारिश

नई दिल्ली, 20 अगस्त। पत्रकारों की सुरक्षा, प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकार कल्याण से जुड़े मुद्दों पर श्रमजीवी पत्रकार संघ, जिला गोहाना की ओर से उठाई गई शिकायत पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। शिकायत संख्या MOIAB/E/2026/0001617, दिनांक 22 जुलाई 2026 के जवाब में PCI ने पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े विभिन्न प्रावधानों एवं प्रक्रियाओं की जानकारी दी है।
PCI ने पत्रकारों एवं मीडिया संस्थानों को हिंसा और संपत्ति के नुकसान से संरक्षण देने के लिए विधायी प्रस्तावों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार से इसी प्रकार का केंद्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की अनुशंसा किए जाने की जानकारी दी है। इसे पत्रकारों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण संस्थागत पहल माना जा रहा है।
परिषद ने स्पष्ट किया कि प्रेस स्वतंत्रता के दमन, पत्रकारों के कार्य में बाधा, उत्पीड़न अथवा प्रेस को उपलब्ध सुविधाओं में अनुचित हस्तक्षेप के मामलों में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया उपलब्ध है। जांच के बाद परिषद संबंधित प्राधिकरण या सरकार के आचरण पर आवश्यक टिप्पणियां भी कर सकती है।
गंभीर मामलों में स्वतः संज्ञान का प्रावधान
PCI ने Press Council (Procedure for Inquiry) Regulations, 1979 के Regulation 13 का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रेस स्वतंत्रता के गंभीर हनन, पत्रकारों पर हमले अथवा हत्या जैसे मामलों में परिषद के अध्यक्ष द्वारा स्वतः संज्ञान (suo motu cognizance) लिया जा सकता है। ऐसे मामलों में Sub-Committee अथवा Fact-Finding Committee का गठन भी किया जा सकता है।
वहीं Regulation 14(f) के तहत संबंधित सरकारी प्राधिकरण को अपना Statement in Reply प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किए जाने का प्रावधान है।
रेलवे रियायत बहाली का मुद्दा भी उठाया
रेलवे में पत्रकारों को मिलने वाली रियायत बहाल करने के मुद्दे पर PCI ने बताया कि रेलवे बोर्ड एवं रेल मंत्रालय को 24 जुलाई 2023, 23 अक्टूबर 2024 और 13 नवंबर 2025 को पत्र भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा 16 जुलाई 2026 के आदेश के माध्यम से तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को संबंधित अधिकारियों के समक्ष यह मांग आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
पत्रकार पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, आवास, शिक्षा, टोल सुविधा और प्रेस पंजीकरण सहित अन्य मुद्दों पर भी PCI ने संबंधित मंत्रालयों एवं सक्षम प्राधिकरणों का उल्लेख किया है। इन मामलों में अब केंद्र और राज्य सरकारों से ठोस एवं समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है। साथ ही डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकारों के लिए समान एवं स्पष्ट मान्यता, सुरक्षा और सुविधाओं की नीति बनाने की आवश्यकता भी सामने आई है।
पत्रकार सुरक्षा लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ा विषय : भूषण अग्रवाल
श्रमजीवी पत्रकार संघ, जिला गोहाना के कानूनी सलाहकार भूषण अग्रवाल, अधिवक्ता ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा केवल पत्रकार समुदाय का विषय नहीं है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की रक्षा से सीधे जुड़ा प्रश्न है। PCI द्वारा बताए गए वैधानिक तंत्र का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए तथा पत्रकारों पर हमले, धमकी, उत्पीड़न और स्वतंत्र पत्रकारिता में हस्तक्षेप के मामलों में समयबद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकारों से पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानूनी व्यवस्था लागू करने के साथ-साथ पत्रकारों को सामाजिक सुरक्षा एवं आवश्यक कल्याणकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ठोस निर्णय लेने की मांग की।


