BS-IV एवं उससे उच्च श्रेणी के वाहनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हरियाणा में स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग
10 वर्ष पुराने डीजल एवं 15 वर्ष पुराने पेट्रोल BS-IV एवं उससे उच्च श्रेणी के वाहनों पर कार्रवाई को लेकर अधिवक्ता भुषण अग्रवाल ने हरियाणा सरकार एवं संबंधित अधिकारियों को भेजा प्रतिनिधित्व

गोहाना/सोनीपत, 03 अगस्त । सिविल कोर्ट, गोहाना के अधिवक्ता भुषण अग्रवाल ने हरियाणा सरकार, परिवहन विभाग, पुलिस विभाग एवं जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रतिनिधित्व भेजकर BS-IV एवं उससे उच्च emission standard वाले वाहनों के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के समान एवं स्पष्ट क्रियान्वयन की मांग की है।
अधिवक्ता भुषण अग्रवाल ने कहा कि यह विषय विशेष रूप से उन वाहन मालिकों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके वाहन BS-IV अथवा उससे उच्च emission standard के हैं और जिनके वाहन डीजल होने की स्थिति में 10 वर्ष तथा पेट्रोल होने की स्थिति में 15 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट के 12 अगस्त 2025 के आदेश का संदर्भ
प्रतिनिधित्व में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा M.C. Mehta v. Union of India & Ors., W.P. (C) No. 13029 of 1985 में I.A. No. 175079/2025 पर दिनांक 12.08.2025 को पारित आदेश का उल्लेख किया गया है।
उक्त आदेश में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरिम रूप से निर्देश दिया था कि केवल इस आधार पर कि वाहन डीजल इंजन के मामले में 10 वर्ष पुराना अथवा पेट्रोल इंजन के मामले में 15 वर्ष पुराना है, वाहन मालिकों के विरुद्ध coercive steps न लिए जाएं।
17 दिसंबर 2025 का महत्वपूर्ण संशोधन — BS-IV एवं उससे आगे के वाहन
इस मामले में दिनांक 17.12.2025 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 12.08.2025 के आदेश के पैरा 2 को संशोधित करते हुए स्पष्ट किया कि उक्त protection BS-IV और उससे आगे के emission versions वाले वाहनों के संबंध में लागू होगी। अर्थात, ऐसे BS-IV एवं उससे उच्च emission standard वाले वाहनों के मालिकों के विरुद्ध केवल वाहन की आयु के आधार पर—डीजल वाहन के मामले में 10 वर्ष तथा पेट्रोल वाहन के मामले में 15 वर्ष—coercive action न लेने का निर्देश दिया गया।
12 मार्च 2026 के निर्णय के बाद प्रशासनिक स्पष्टता आवश्यक
इसके पश्चात माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक 12.03.2026 को 2026 INSC 383 में मूल दीर्घकालीन writ proceedings को औपचारिक रूप से पुनर्गठित करते हुए विभिन्न मुद्दों के लिए अलग-अलग suo motu proceedings का ढांचा निर्धारित किया।
अधिवक्ता भुषण अग्रवाल ने अपने प्रतिनिधित्व में इस स्थिति की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए मांग की है कि 12.08.2025 के आदेश, 17.12.2025 के संशोधन तथा 12.03.2026 के निर्णय को समग्र रूप से ध्यान में रखते हुए हरियाणा में BS-IV एवं उससे उच्च श्रेणी के वाहनों के संबंध में स्पष्ट प्रशासनिक निर्देश जारी किए जाएं।
हरियाणा के विभिन्न जिलों में एक समान कार्रवाई की मांग
अधिवक्ता भुषण अग्रवाल ने कहा कि यदि अलग-अलग जिलों में प्रवर्तन अधिकारी इस संबंध में अलग-अलग प्रक्रिया अपनाते हैं तो वाहन मालिकों में असमंजस पैदा हो सकता है और अनावश्यक विवाद एवं मुकदमेबाजी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
इसलिए राज्य स्तर पर स्पष्ट निर्देश जारी कर यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि समान परिस्थितियों वाले BS-IV एवं उससे उच्च emission standard वाले वाहन मालिकों के साथ पूरे हरियाणा में समान एवं कानूनसम्मत व्यवहार हो।
सरकार से प्रमुख मांगें
प्रतिनिधित्व के माध्यम से सरकार से मुख्य रूप से निम्न मांगें की गई हैं—
1. माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 12.08.2025 के आदेश एवं 17.12.2025 के संशोधन की वर्तमान कानूनी स्थिति को 12.03.2026 के निर्णय के संदर्भ में स्पष्ट किया जाए।
2. हरियाणा के सभी संबंधित जिला प्रशासन, पुलिस अधिकारियों, Regional Transport Authorities, Registering Authorities एवं enforcement agencies को स्पष्ट एवं एक समान दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
3. BS-IV एवं उससे उच्च emission standard वाले वाहनों के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
4. केवल वाहन की आयु—डीजल के लिए 10 वर्ष एवं पेट्रोल के लिए 15 वर्ष—के आधार पर BS-IV एवं उससे उच्च emission standard वाले वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई के संबंध में पूरे राज्य में एक समान प्रक्रिया अपनाई जाए, subject to the subsisting orders and applicable law.
5. राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में लिए गए निर्णय एवं जारी किए गए निर्देशों से संबंधित पक्षों को अवगत कराया जाए, ताकि अनावश्यक विवाद एवं मुकदमेबाजी को रोका जा सके।
“मांग किसी विशेष वाहन के लिए नहीं, बल्कि पूरे राज्य में समान कानूनी व्यवस्था के लिए है”
अधिवक्ता भुषण अग्रवाल ने कहा कि उनका प्रतिनिधित्व किसी व्यक्ति विशेष अथवा किसी विशेष वाहन को अनुचित लाभ दिलाने के लिए नहीं है। इसका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की सही व्याख्या एवं समान रूप से अनुपालना हो तथा हरियाणा के विभिन्न जिलों में समान परिस्थितियों वाले वाहन मालिकों के साथ समान व्यवहार किया जाए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने से प्रशासनिक भ्रम दूर होगा, वाहन मालिकों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकेगा और अनावश्यक मुकदमेबाजी की संभावना भी कम होगी।
यह प्रतिनिधित्व जनहित में प्रस्तुत किया गया है तथा इसका उद्देश्य माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के faithful implementation के साथ-साथ प्रशासनिक कार्रवाई में स्पष्टता, समानता एवं एकरूपता सुनिश्चित करना है।
प्रतिनिधित्व हरियाणा के मुख्य सचिव, परिवहन विभाग, पुलिस महानिदेशक, उपायुक्त सोनीपत एवं पुलिस आयुक्त सोनीपत सहित संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है ।
मोबाइल: +91-8684948477

