देश के वैज्ञानिक भविष्य की मजबूत आधारशिला है, रामानुजन की विरासत
एसजीटी यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय मंथन में जुटे देश विदेश के चिंतक


गुरुग्राम, (अनिल जिंदल) 08 मार्च । गुरुग्राम स्थित श्री गुरु गोबिंद सिंह ट्राई सेंटेनरी यूनिवर्सिटी (एसजीटीयू) में महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की स्मृति में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल समापन हुआ। विद्वानों ने एकमत से कहा कि रामानुजन की विरासत केवल भारत के अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि देश के वैज्ञानिक भविष्य की मजबूत आधारशिला भी है।
सम्मेलन भारत में समकालीन गणितीय विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ।
एसजीटीयू, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज और शिक्षा संस्कृति न्यास के संयुक्त प्रयास व सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य विषय “रामानुजन की विरासत और उससे भविष्य की पीढ़ियों को मिलने वाली प्रेरणा” रहा।
सम्मेलन ने “द मैन हू न्यू इन्फिनिटी” के नाम से विख्यात रामानुजन की ऐतिहासिक प्रतिभा को 21वीं सदी की उन्नत कम्प्यूटेशनल चुनौतियों से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास किया।
दूसरे दिन सुबह का सत्र विश्वविद्यालय के रवींद्रनाथ टैगोर ब्लॉक में आयोजित हुआ, जिसमें देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने रामानुजन की प्रसिद्ध नोटबुक्स के गूढ़ गणितीय पक्षों पर चर्चा की। डॉ कृष्णन राजकुमार (जवाहर लाल विश्वविद्यालय) ने अपने व्याख्यान में रामानुजन के टेलिस्कोपिंग कंटीन्यूड फ्रैक्शंस के कार्य को 14वीं सदी के केरल के महान गणितज्ञ माधवा आफ संगमग्रामा (माधवाचार्य के नाम से मशहूर) से जोड़ते हुए ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किया।
इसी क्रम में डॉ गजेन्द्र प्रताप सिंह (जेएनयू )
ने रामानुजन के संयोजनात्मक गणित की अद्भुत शक्ति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पार्टिशन और जनरेटिंग फंक्शन्स पर रामानुजन का कार्य आज ग्राफ स्पेक्ट्रा, डेटा साइंस और नेटवर्क थ्योरी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सत्र का एक विशेष आकर्षण डॉ गौरव भटनागर ( अशोका यूनिवर्सिटी) का व्याख्यान रहा। रामानुजन और लॉग डेरिवेटिव्स पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि रामानुजन की प्रतिभा कोई दुर्लभ वरदान नहीं थी, बल्कि पैटर्न पहचानने की असाधारण क्षमता थी जिसे समर्पित विद्यार्थी भी विकसित कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को गणित को स्थिर विषय नहीं बल्कि एक निरंतर विकसित होती तार्किक प्रक्रिया के रूप में देखने की प्रेरणा दी।
सम्मेलन में देश के अन्य प्रमुख संस्थानों के विद्वानों ने भी अपने शोध प्रस्तुत किए। डॉ सत्यनारायण रेड्डी
(शिव नाडर यूनिवर्सिटी ) ने रामानुजन सम्स के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ ए. स्वामीनाथन
(आईआईटी, रुड़की) ने रामानुजन प्रकार के एंटायर फंक्शन्स की कम्प्लीट मोनोटोनिसिटी और इंटीग्रल रिप्रेजेंटेशन पर अपना शोध प्रस्तुत किया।
भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए डॉ जगदीश बंसल (साउथ एशियन यूनिवर्सिटी ) ने कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस पर चर्चा की और कहा कि रामानुजन की सहज समस्या-समाधान क्षमता आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैचारिक पूर्वज मानी जा सकती है।
पूरे सत्र का संचालन प्रो(डॉ) अशोक कुमार अग्रवाल ने किया, जिन्होंने विद्वानों और उपस्थित शोधार्थियों के बीच सार्थक संवाद सुनिश्चित किया। सम्मेलन में देशभर के केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों से आए शोधार्थियों और प्रतिभागियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे गुरुग्राम गणितीय उत्कृष्टता के एक जीवंत राष्ट्रीय केंद्र में बदल गया।



