गोहाना पुरानी सब्जी मंडी स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा में मंगलवार को गुरु हरिकिशन का प्रकाशोत्सव मनाया गया। हरिकिशन सिखों के आठवें गुरु थे। गुरुद्वारा में मुख्य ग्रंथी भाई रणजीत सिंह ने गुरुपाठ कर संगत को निहाल किया। गुरुपाठ के समापन पर गुरुद्वारा में लंगर लगाया गया। लंगर में सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। गुरुद्वारा कमेटी के महासचिव डॉ. सुरेश सेतिया ने कहा कि मात्र 5 वर्ष की उम्र में गुरु हरिकिशन पिता गुरु हरिराय की मृत्यु के बाद गद्दी पर बैठ गए थे। गुरु हरिराय सिखों के सातवें गुरु थे।
गद्दी पर बैठने के उपरांत उन्होंने सेवा का जोरदार अभियान चलाया, जिससे वे बालापीर के नाम से प्रसिद्ध हुए। सभा के अध्यक्ष सरदार काबुल सिंह ने कहा कि बचपन से ही गुरु हरिकिशन गंभीर और सहनशील प्रवृत्ति के थे। वह 5 वर्ष की उम्र में भी आध्यात्मिक साधना में लीन रहते थे। उनके पिता अक्षर उनकी कठिन परीक्षा लेते रहते थे। उन्होंने संगत को गुरुओं के दिखाए हुए रास्ते पर अग्रसर रहने का संदेश दिया। इस अवसर पर जगदीश चिंदा, केसरदास, शशिबाला, सुनीता, कमलेश, हरीश कुमार, जगजीत सिंह आदि उपस्थित थे।



